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UP: आकाश आनंद की वापसी को लेकर संशय बरकरार... मायावती के इस फैसले के बाद साधी चुप्पी; सक्रियता भी हुई कम
Wed, 19 Jun 2024 09:40 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 19 Jun 2024 09:40 AM IST
सार
यूपी में उपचुनाव के लिए बसपा मजबूत प्रत्याशी तलाश रही है। बहुजन समाज पार्टी विधानसभा में अपनी सीटों को बढ़ाने की कवायद में जुटी है। जिलाध्यक्षों से उम्मीदवारों के नाम मांगे गए हैं। वहीं, आकाश आनंद की वापसी को लेकर संशय बरकरार है।
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Akash Anand
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बहुजन समाज पार्टी विधानसभा की रिक्त हुई 10 सीटों पर मजबूत प्रत्याशियों को उतारने की कवायद में जुटी है। पार्टी उपचुनाव के जरिए विधानसभा में अपनी उपस्थिति को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। बता दें कि विधानसभा में बसपा के उमाशंकर सिंह अकेले विधायक हैं।
लोकसभा, राज्यसभा और विधान परिषद में पार्टी का कोई भी सदस्य नहीं है। पार्टी सूत्रों की मानें तो उपचुनाव के लिए मजबूत उम्मीदवारों के नामों की फेहरिस्त तैयार करने का जिम्मा इस बार जिलाध्यक्षों को सौंपा गया है।
वह उम्मीदवारों के बारे में सीधे बसपा सुप्रीमो मायावती को अपनी रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद हाईकमान अंतिम निर्णय लेगा। लोकसभा चुनाव में हुई करारी शिकस्त के बाद उपचुनाव से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को दूर रखा जा रहा है।
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जानकारों के मुताबिक बसपा के लिए उपचुनाव में अपने प्रत्याशी उतारना मजबूरी बन चुका है क्योंकि आजाद समाज पार्टी भी उपचुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है। यदि बसपा उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेती है तो दलित वोट बैंक आजाद समाज पार्टी की ओर रुख कर सकता है।
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लोकसभा, राज्यसभा और विधान परिषद में पार्टी का कोई भी सदस्य नहीं है। पार्टी सूत्रों की मानें तो उपचुनाव के लिए मजबूत उम्मीदवारों के नामों की फेहरिस्त तैयार करने का जिम्मा इस बार जिलाध्यक्षों को सौंपा गया है।
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वह उम्मीदवारों के बारे में सीधे बसपा सुप्रीमो मायावती को अपनी रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद हाईकमान अंतिम निर्णय लेगा। लोकसभा चुनाव में हुई करारी शिकस्त के बाद उपचुनाव से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को दूर रखा जा रहा है।
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जानकारों के मुताबिक बसपा के लिए उपचुनाव में अपने प्रत्याशी उतारना मजबूरी बन चुका है क्योंकि आजाद समाज पार्टी भी उपचुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है। यदि बसपा उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेती है तो दलित वोट बैंक आजाद समाज पार्टी की ओर रुख कर सकता है।
यही वजह है कि अपने वोट बैंक को बचाए रखने और विधानसभा में अपने सदस्यों की संख्या को बढ़ाने के लिए बसपा उपचुनाव में उतरने की तैयारी में है। बता दें कि बसपा ने लोकसभा चुनाव के साथ हुए चार विधानसभा उपचुनाव में भी अपने प्रत्याशी उतारे थे, हालांकि उसे किसी भी सीट पर सफलता नहीं मिली थी।
आकाश आनंद को लेकर कौतूहल बरकरार
पार्टी के पूर्व नेशनल कोआर्डिनेटर और राजनीतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद की वापसी को लेकर अभी कौतूहल बरकरार है। लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद को सभी पदों से हटाने का मायावती का फैसला पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा है।
पार्टी के पूर्व नेशनल कोआर्डिनेटर और राजनीतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद की वापसी को लेकर अभी कौतूहल बरकरार है। लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद को सभी पदों से हटाने का मायावती का फैसला पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा है।
वहीं आकाश आनंद ने भी मायावती के इस फैसले के बाद चुप्पी साध ली है और उनकी सक्रियता कम हो गई है। जल्द होने वाली चुनावी समीक्षा बैठक में आकाश आनंद के आने पर भी असमंजस बना हुआ है।