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UP News : साल भर से पेशी पर तलब न होने वाले बंदियों का वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगा ट्रायल

Thu, 09 Mar 2023 10:00 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 09 Mar 2023 10:00 PM IST
सार

विभागीय आंकड़ों के अनुसार 232 ऐसे बंदी प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद हैं, जिनकी एक साल या इससे अधिक समय से न्यायालय में पेशी नहीं हुई है। इनमें अयोध्या परिक्षेत्र के 16 बंदी, लखनऊ के 55, कानपुर के 8, वाराणसी के 10, प्रयागराज के 5, मेरठ के 41, गोरखपुर के 24, बरेली के 28 और आगरा परिक्षेत्र के 45 बंदी शामिल हैं।

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UP News: Trial will be done through video conferencing of the prisoners who have not been summoned for the who
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

प्रदेश सरकार ऐसे बंदियों की वीडियोकांफ्रेंसिंग के जरिए ट्रायल कराएगी, जिनकी एक साल से अधिक समय से न्यायालय के समक्ष पेशी नहीं हुई है। मुख्य सचिव को कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की मुहर लगने के बाद इसे अमल में लाया जाएगा।

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विभागीय आंकड़ों के अनुसार 232 ऐसे बंदी प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद हैं, जिनकी एक साल या इससे अधिक समय से न्यायालय में पेशी नहीं हुई है। इनमें अयोध्या परिक्षेत्र के 16 बंदी, लखनऊ के 55, कानपुर के 8, वाराणसी के 10, प्रयागराज के 5, मेरठ के 41, गोरखपुर के 24, बरेली के 28 और आगरा परिक्षेत्र के 45 बंदी शामिल हैं। विभाग के मुताबिक इन बंदियों को एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरण होने, दोष सिद्ध होने के चलते न्यायालय ने पेशी के लिए बीते एक वर्ष से अधिक समय से नहीं बुलाया है।
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थाने से मिल सकेगी जमानत
कारागार में निरुद्ध ऐसे दोषसिद्ध बंदी, जिन्हें न्यायालय से 3 माह से 7 वर्ष तक की सजा सुनाई है, उनकी जमानत थानों से दिए जाने की भी सिफारिश की है। इस संबंध में न्याय विभाग से परामर्श लिया जाएगा। प्रदेश की जेलों में 2371 ऐसे बंदी हैं। सबसे ज्यादा 395 बंदी मथुरा की जेल में हैं। इसके अलावा गाजियाबाद की जेल में 235 बंदी, अलीगढ़ जेल में 213 बंदी, नैनी-प्रयागराज की जेल में 160 बंदी और मुजफ्फरनगर की जेल में 107 बंदी हैं।

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