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UP News : सप्लाई की घटिया मशीन, कीमत के साथ चुकाए पांच लाख हर्जाना, राज्य उपभोक्ता आयोग पीठ का आदेश
Fri, 07 Apr 2023 04:03 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 07 Apr 2023 04:03 PM IST
सार
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में गठित विकास सक्सेना व सुधा उपाध्याय की पीठ ने माना कि मशीन की फाल्ट दूर कराने के लिए जो कर्मचारी भेजे गए वह भी उसे ठीक नहीं करा पाए।
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उपभोक्ता आयोग
- फोटो : DEMO Pics
विस्तार
पूरी कीमत चुकाने के बाद खरीदी गई मशीन दावे के अनुरूप उत्पादन न करे और बार बार खराब हो जाए, तो यह खरीदार को दी गई सेवा में कमी है। इस लिए विक्रेता फर्म खरीदार को मशीन की पूरी कीमत (50 लाख) के साथ पांच लाख रुपये का हर्जाना भी चुकाए। यह आदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की तीन सदस्यीय पूर्ण पीठ ने किया।
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आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में गठित विकास सक्सेना व सुधा उपाध्याय की पीठ ने माना कि मशीन की फाल्ट दूर कराने के लिए जो कर्मचारी भेजे गए वह भी उसे ठीक नहीं करा पाए। इससे अपीलकर्ता को आर्थिक नुकसान के साथ ही मानसिक कष्ट भी उठाना पड़ा। इस लिए मशीन की कुल कीमत पर खरीद की तारीख से अंतिम अदायगी की तिथि तक 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज भी चुकाया जाए। एक माह में आदेश का अनुपालन न होने पर फर्म को मशीन की कुल कीमत पर 18 प्रतिशत ब्याज के साथ क्षतिपूर्ति के लिए 05 की जगह 10 लाख रुपये हर्जाना देना पड़ेगा।
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अक्तूबर 2018 में खरीदी थी माईक्रोनी बनाने की मशीन
बंधरा, कानपुर रोड लखनऊ निवासी दीपक गुप्ता ने माईक्रोनी, पास्ता, सेवई व चायनीज नूडल्स बनाने के लिए औद्योगिक क्षेत्र संडीला, हरदोई में मेसर्स डे फूड प्रोडक्टस के नाम से एक फैक्ट्री खोली। इसके लिए मैसर्स नोयडा स्थित केपी ऑटोमेसंस फर्म से 50.15 लाख रुपये कीमत की एक आधुनिक मशीन खरीदने पर सहमति बनी। दीपक ने फैक्ट्री को शुरू करने के लिए मई 2018 में बैंक से टर्म लोन लेने के बाद 500 किग्रा प्रति घंटा उत्पादन करने वाली मशीन की खरीद का आर्डर संबंधित फर्म को दिया। पूर्ण भुगतान करने के बाद 30 अक्तूबर 2018 को मशीन संडीला स्थित फैक्ट्री पहुंची।
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कम क्षमता के थे उपकरण, गुणवत्ता भी खराब
खरीदार का कहना है कि मशीन बेचने वाली फर्म ने पूरा भुगतान पाने के बाद कम क्षमता के उपकरण युक्त मशीन भेजी। मशीन को क्रियाशील कराने के लिए भी कोई प्रशिक्षित कर्मी नहीं भेजा। शिकायत के बाद आए कर्मचारी ने मशीन में कुछ जरूरी पार्टस उपलब्ध न होने की बात कही। इस कारण मशीन से निर्मित खाद्य सामग्री की गुणवत्ता भी काफी खराब रही।
मशीन के आए दिन खराब होने की समस्या बनी रही। इससे परेशान होकर दीपक ने मशीन वापस करवाने व नुकसान की भरपाई के लिए राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दाखिल की। इस पर आपत्ति करते हुए मशीन बेचने वाली फर्म ने कहा कि उसे मशीन की पूरी कीमत नहीं मिली है। खरीदार पर अभी भी 2.25 लाख रुपये देना बाकी है। इस लिए यह सेवा में कमी का मामला नहीं है।