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UP News : 75 गो आश्रय स्थल के लिए पहले चरण में छह सौ करोड़ का बजट, एक पर आएगा आठ करोड़ खर्च
Fri, 08 Jul 2022 07:53 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 08 Jul 2022 07:53 AM IST
सार
इस समय प्रदेश सरकार का गोवंश संरक्षण पर पूरा जोर है। सीएम योगी इस बाबत जिलों में बड़े गो आश्रय स्थल बनाने की बात कह चुके हैं।
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विस्तार
छुट्टा जानवर सड़कों पर न घूमें और उनका भरपूर उपयोग हो सके इसके लिए सरकार गंभीर है। बड़े बजट के साथ प्रदेश में बड़े गो संरक्षण केंद्र बनाने की सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। पहले चरण में इसके लिए छह सौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। प्रत्येक केंद्र या आश्रय स्थल पर आठ करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही जा रही है। हालांकि जिलों से इससे ज्यादा रकम खर्च करने केप्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं।
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इस समय प्रदेश सरकार का गोवंश संरक्षण पर पूरा जोर है। सीएम योगी इस बाबत जिलों में बड़े गो आश्रय स्थल बनाने की बात कह चुके हैं। विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक प्रदेश में लगभग 12 लाख छुट्टा गोवंश था जिसमें से लगभग दस लाख को आश्रय स्थलों में भेजा जा चुका है। दो लाख पशु अभी छुट्टा घूम रहे हैं जिन्हें दिसंबर तक आश्रय स्थलों में भेज दिया जाएगा।
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इसके लिए सभी जिलों में चार हजार पशु तक की क्षमता के गो आश्रय स्थल बनाने की तैयारी शुरू की जा रही है। इसके लिए जिलों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। पशुपालन विभाग के निदेशक डा. इंद्रमणि के मुताबिक 1,40,000 गोवंश को मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत लोगों को दिया गया है। उन्हें तीस रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। 30 जून तक का भुगतान भेज दिया गया है।
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सीतापुर और झांसी ने भेजे बड़े प्रस्ताव
सीतापुर जिले से 9946 वर्ग मीटर में गो संरक्षण केंद्र बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। 10 हजार पशुओं से अधिक क्षमता के इस आश्रय स्थल पर 30 करोड़ रुपये खर्च आने का एस्टीमेट बनाया गया है। इसकेअलावा झांसी से 15 करोड़ रुपये खर्च कर आश्रय स्थल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रत्येक ऐसे गो संरक्षण केंद्र में कैटल शेड, भूसा गोदाम, पशु अस्पताल, कार्यालय, गार्डरूम, पंप रूम तथा स्टोर बनाना अनिवार्य है।
‘प्रदेश सरकार की मंशा है कि एक भी गोवंश आवारा न घूमे। इसके लिए सभी 75 जिलों में बड़े गो आश्रय स्थल बनाने की तैयारी है। साथ ही गो संरक्षण केंद्रों पर वाराणसी मॉडल लागू करेंगे। यहां गोबर से खाद, बायोगैस आदि बनाई जा सकेगी। गाय के जरिए प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा।’
- धर्मपाल सिंह, मंत्री पशुधन