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UP News : घरेलू कोयले का उत्पादन बढ़ने के बावजूद आयातित कोयले की खरीद, सीबीआई जांच की मांग

Fri, 15 Jul 2022 12:02 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 15 Jul 2022 12:02 AM IST
सार

जून 2022 में जहां कोल इंडिया द्वारा 51.56 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया गया है जबकि जून 2021 में यह उत्पादन केवल 40.01 मिलियन टन था यानी बीते साल के मुकाबले इस साल जून में 28.9 प्रतिशत ज्यादा कोयले का उत्पादन किया गया।

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UP News: Despite the increase in domestic coal production, the purchase of imported coal, demand for CBI investigation
भारतीय रेलवे कोयला आपूर्ति

विस्तार

देश में घरेलू कोयले का उत्पादन बढ़ने के बावजूद बिजलीघरों के लिए आयातित कोयले की खरीद की जा रही है। बीते साल के मुकाबले इस साल जून में घरेलू कोयले के उत्पादन में 28.9 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसका खुलासा कोयला सचिव डॉ. अनिल कुमार जैन की ओर से कैबिनेट सचिव राजीव गाबा को भेजे गए पत्र से हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार की ओर से दो महीने के लिए आयातित कोयले की खरीद की हरी झंडी दिए जाने के  बाद प्रदेश के बिजलीघरों को आवंटित कोटे के अनुसार पर्याप्त घरेलू कोयले की आपूर्ति शुरू कर दी गई। 

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पत्र में बताया गया है कि जून 2022 में जहां कोल इंडिया द्वारा 51.56 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया गया है जबकि जून 2021 में यह उत्पादन केवल 40.01 मिलियन टन था यानी बीते साल के मुकाबले इस साल जून में 28.9 प्रतिशत ज्यादा कोयले का उत्पादन किया गया। यही नहीं कोल इंडिया द्वारा पावर सेक्टर को जून 2021 के मुकाबले जून 2022 में 26.5 प्रतिशत ज्यादा कोयला आपूर्ति किया गया। 
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विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कोयला सचिव के पत्र से साफ है कि देश में घरेलू कोयले की कोई कमी नहीं है। यह केवल 3000 रुपये प्रति टन की कीमत वाले घरेलू कोयले की जगह 20,000 रुपये प्रति टन की दर पर आयातित कोयले की खरीद का षडयंत्र है। इतना ही नहीं जून 2021 में पावर सेक्टर पर कोल इंडिया का जहां 20,383 करोड़ रुपये बकाया था वह 30 जून 22 को 15252 करोड़ रह गया है। इससे साफ है कि राज्य अपने बकाये का भुगतान भी कर रहे हैं। ऐसे में कोल इंडिया यह नहीं कह सकता कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं।
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अवधेश वर्मा ने कहा कि आयातित कोयले की खरीद के लिए चल रहे खेल का पता इससे भी चलता है कि राज्य सरकार की ओर से इसके लिए मंजूरी देने के साथ ही प्रदेश को घरेलू कोयले की आपूर्ति बढ़ा दी गई। इससे साबित होता है कि सारी पेशबंदी आयातित कोयले की खरीद के लिए की जा रही थी। वर्मा ने प्रधानमंत्री से पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच की मांग की है।

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