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UP: एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही की फर्म से भी हुई थी नशीले कफ सिरप की सप्लाई, जांच में चौंकाने वाले खुलासे

Sat, 29 Nov 2025 08:52 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 29 Nov 2025 08:52 PM IST
सार

एसटीएफ बर्खास्त सिपाही आलोक की तलाश में दबिश दे रही है अभी तक उसका सुराग नहीं मिला है। उसकी फर्म पर लाखों के लेनदेन की आशंका है।

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UP: Narcotic cough syrup was also supplied from the firm of a dismissed STF constable.
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप की सप्लाई में एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह का नाम सामने आया है। एसटीएफ आलोक की तलाश में दबिश दे रही है। हालांकि, अभी तक वह उसे पकड़ नहीं सकी है। सूत्रों का कहना है कि जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और मिर्जापुर समेत कई जिलों में एसटीएफ ने छापा मारा, लेकिन आलोक का सुराग नहीं लगा।

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पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए अमित सिंह टाटा के साथ मिलकर आलोक ने भी अपनी फर्म बनाई थी। आलोक की फर्म से भी नशीले कफ सिरप की सप्लाई की गई थी। उसकी फर्म से लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। इस मामले से जुड़ा का एक पन्ना शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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पन्ने में स्पष्ट लिखा है कि अमित सिंह ने पूछताछ में आलोक का नाम बताया। अमित और आलोक ने विकास सिंह के माध्यम से शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल और विशाल मेहरोत्रा से बात की थी। सभी के कहने पर दोनों ने जनवरी 2024 में फर्म बनाई थी। फर्म का सारा लेनदेन शुभम, वरुण और उनका सीए देखता था।

धनबाद में लगाए थे पांच-पांच लाख रुपये
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अमित ने बताया है कि धनबाद में उसने और आलोक ने पांच-पांच लाख रुपये लगाए थे। इसके एवज में अमित और आलोक को करीब 22 लाख रुपये मिले थे। कफ सिरप की सप्लाई के लिए दोनों कई बार धनबाद भी गए थे। धनबाद का काम वरुण देखता था। आरोपियों ने नशे के इस कारोबार से लाखों रुपये कमाए हैं।

वाराणसी में भी खोली थी फर्म, नकद में करते थे लेनदेन

सूत्रों के मुताबिक गिरोह के कहने पर आलोक और अमित ने अपने-अपने नाम से वाराणसी में भी फर्म खोली थी। आलोक ने मां शारदा मेडिकल के नाम से फर्म बनाई थी। वाराणसी की फर्म में आरोपियों ने दो-तीन माह ही कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप का व्यापार किया था। आरोपी सारा लेनदेन नकद में करते थे। वाराणसी में दोनों को करीब आठ लाख रुपये का मुनाफा हुआ था। अमित इन रुपयों को अपनी पत्नी के खाते में जमा कर देता था।

बाहुबली से नहीं हो सकी पूछताछ
मामले में पूर्वांचल के एक बाहुबली का नाम सामने आ रहा है। एक विधायक भी अमित के करीबी बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि एसटीएफ अभी तक बाहुबली से पूछताछ नहीं कर सकी है। माना जा रहा है कि आलोक के पकड़े जाने के बाद कई बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे। कुछ सफेदपोश भी एसटीएफ की रडार पर हैं। एसटीएफ आलोक की संपत्ति के बारे में भी पता लगा रही है। आलोक भी बाहुबली का करीबी है।

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