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UP: कांशीराम जयंती पर मायावती का नया प्लान, 15 मार्च को दो लाख से अधिक समर्थकों के आने की संभावना

Wed, 11 Mar 2026 09:58 PM IST
Akash Dwivedi अशोक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अशोक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 11 Mar 2026 09:58 PM IST
सार

बसपा संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती पर 15 मार्च को यूपी समेत नौ राज्यों में पार्टी शक्ति प्रदर्शन करेगी। लखनऊ के कांशीराम स्थल पर दो लाख से अधिक समर्थकों के जुटने का अनुमान है। विभिन्न राज्यों में नेताओं को कार्यक्रम सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सपा और कांग्रेस के रुख से बसपा सतर्क है।

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UP: Mayawati's new plan for Kanshi Ram Jayanti, more than two lakh supporters expected on March 15
मायावती - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की आगामी 15 मार्च को 92वीं जयंती के अवसर पर यूपी समेत नौ राज्यों में पार्टी द्वारा अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। राजधानी की पुरानी जेल रोड स्थित कांशीराम स्थल पर दो लाख से अधिक बसपा समर्थकों का जमावड़ा होने की संभावना जताई जा रही है। इसी तरह राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब आदि राज्यों में भी मुख्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन राज्यों को शक्ति प्रदर्शन के लिए चुना गया है, उनमें से अधिकतर में आगामी एक वर्ष के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की राजस्थान के भरतपुर में होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए कई पदाधिकारियों को लगाया गया है।
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इसी तरह राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को हरियाणा व पंजाब, राजाराम को मध्य प्रदेश, रामजी गौतम को महाराष्ट्र, अतर सिंह को तेलंगाना, लालजी मेधांकर को पश्चिम बंगाल, धर्मवीर अशोक को केरल में कांशीराम जयंती पर समर्थकों की भीड़ जुटाने और संबोधित करने का निर्देश दिया गया है।

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सपा और कांग्रेस के रुख से बेचैनी

जानकारों की मानें तो कांशीराम जयंती पर सपा और कांग्रेस द्वारा भी कार्यक्रम आयोजित करने की वजह से बसपा अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। पार्टी अपने संस्थापक की जयंती को इसी वजह से वृहद स्तर पर मनाने जा रही है ताकि विपक्ष को इसका फायदा नहीं मिल पाए। खासकर इस बार कांशीराम को लेकर कांग्रेस के बदले रुख की वजह से बसपा अतिरिक्त सावधानी बरत रही है।

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