UP: 5वीं फेल पार्टनर के साथ 200 करोड़ की साइबर ठगी, लखनऊ कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड कोलकाता से गिरफ्तार
लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर की आड़ में विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन मुख्य आरोपी कोलकाता से गिरफ्तार किए गए। जांच में बड़े स्तर पर साइबर अपराध, फर्जी कॉल सेंटर संचालन और भारी वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
विस्तार
लखनऊ में इंटरनेशनल कॉल सेंटर की आड़ में विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना विनीत वशिष्ठ, उसकी गर्लफ्रेंड रिंकी दास गुप्ता और उसके पार्टनर नायकर जयराज को पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है। एडीसीपी क्राइम किरण यादव के मुताबिक, तीनों आरोपी कॉल सेंटर पर छापेमारी के बाद फरार हो गए थे। विनीत वशिष्ठ पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के पार्टनर नायकर जयराज महज पांचवीं तक पढ़ा है। इसके बावजूद उसने लखनऊ की समिट बिल्डिंग के दो हिस्से करीब तीन करोड़ रुपये सालाना किराये पर लेकर इंटरनेशनल कॉल सेंटर संचालित किया। यहां 119 कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था, जो विदेशी नागरिकों को फोन कर विभिन्न तरीकों से साइबर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह ने एक वर्ष में करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी की।
दो एप्पल आईफोन और पांच हजार रुपये नकद बरामद
एडीसीपी ने बताया कि एक जुलाई को कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद फरार मुख्य सरगना और उसके साथियों की तलाश जारी थी। पुलिस को सूचना मिली कि तीनों कोलकाता के एक रिसॉर्ट में छिपे हैं, जहां दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से एक आईपैड, दो एप्पल आईफोन और पांच हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।
पूछताछ में सामने आया कि लखनऊ से भागते समय विनीत और जयराज ने अपने मोबाइल फोन नदी में फेंक दिए थे, जबकि रिंकी ने महंगा मोबाइल होने के कारण केवल सिम कार्ड फेंका और नए सिम से रिसॉर्ट बुक कर लिया। इसी डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस तीनों तक पहुंचने में सफल रही।
समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा
समिट बिल्डिंग के भीतर संगठित गिरोह सोलेरिस सॉल्यूशन के नाम से फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कर रहा था। जनवरी 2025 में खोले गए इस सेंटर से गिरोह ने अमेरिकी नागरिकों से करीब 250 करोड़ से अधिक रुपयों की वसूली की। गिरोह के निशाने पर बुजुर्ग या विदेशी महिलाएं रहती थीं। इस मामले में विभूति खंड थाने में केस दर्ज किया गया है।
डीसीपी क्राइम अनिल यादव के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। अब तक की छानबीन में सामने आया है कि टेली कॉलर्स 30 से 40 हजार रुपये वेतन लेते थे। कॉल सेंटर में काम करने वालों के लिए अंग्रेजी अनिवार्य थी ताकि वे विदेशी नागरिकों से बात कर सकें।
सभी को ट्रेनिंग भी दी गई थी। कॉलर ठगी के लिए वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल सिस्टम का इस्तेमाल करते थे। इनके साथी यूएस में भी मौजूद हैं, जो सभी को गाइड करते थे। मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है। गिरोह में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात में छापा मारकर सभी से पूछताछ शुरू की गई। ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार शुरू में पुलिस को गुमराह करते रहे। उधर, पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं।
बड़ी संख्या में महिला पुलिस को बुलाया गया। मंगलवार देर रात शुरू हुई छानबीन बुधवार शाम तक चलती रही। ललित और विक्रम ने गिरोह के सरगना समेत कुछ बड़े लोगों के नाम लिए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। लखनऊ पुलिस बृहस्पतिवार को पूरे मामले के बारे में जानकारी देगी।