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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Major change for primary school teachers, those with B.Ed qualification will have to do this course

यूपी: प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के लिए बड़ा बदलाव, बीएड योग्यता वाले शिक्षकों को करना होगा यह कोर्स

Sun, 14 Dec 2025 07:34 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 14 Dec 2025 07:34 PM IST
सार

Primary Teachers of UP: यूपी के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे उन शिक्षकों के लिए बड़ा बदलाव है जिनकी योग्यता बीएड है। उन्हें ब्रिज कोर्स करने का आदेश जारी हो गया है।  

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UP: Major change for primary school teachers, those with B.Ed qualification will have to do this course
यूपी में प्राइमरी शिक्षक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में जारी आदेश के क्रम में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात बीएड योग्यता धारी शिक्षकों को छह महीने का ब्रिज कोर्स कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे लगभग 33 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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पूर्व में परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 के लिए बीएड योग्यता को अमान्य कर दिया गया है। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने अंशुमान सिंह बनाम नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन व अन्य में 8 अप्रैल 2024 को आदेश जारी किया था। इसमें वर्तमान में तैनात शिक्षकों को छह महीने के ब्रिज कोर्स कराने का आदेश दिया था।
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इसी क्रम में बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी बीएसए को निर्देश जारी करके बीएड योग्यता धारी शिक्षकों को यह कोर्स कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बीएड योग्यता धारी शिक्षकों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) द्वारा छह महीने का ब्रिज कोर्स ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग विधि से कराया जा रहा है।
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इसके लिए रजिस्ट्रेशन 25 दिसंबर तक किए जाएंगे। उन्होंने सभी बीएड योग्यता धारी शिक्षकों के इस कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी बताया है कि इस ब्रिज कोर्स को निर्धारित समय पर न पूरा करने वाले बीएड योग्यता धारी शिक्षकों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया जाएगा। इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।


विभाग के अनुसार प्रदेश में लगभग 33 हजार शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित हैं। वहीं शिक्षकों ने कहा कि कोर्स के लिए शुल्क लगभग 25 हजार रुपए है। यह शुल्क विभाग देगा या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं है। जबकि पूर्व में यह शुल्क विभाग देता था।

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