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UP: यूपी में 9.13 लाख करोड़ के लोन का अनुमान, खेती को मिलेगा 34 प्रतिशत हिस्सा
Fri, 06 Feb 2026 09:55 AM IST
ishwar ashish
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 06 Feb 2026 09:55 AM IST
सार
नाबार्ड की स्टेट फोकस रिपोर्ट में मशीनीकरण और पशुपालन को विकास की कुंजी बताया गया है। कृषि निवेश को बढ़ाने पर जोर देते हुए मशीनीकरण, सिंचाई और पशुपालन के लिए अधिक ऋण देने की सिफारिश की गई है।
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- फोटो : Freepik
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विस्तार
नाबार्ड की स्टेट फोकस रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश में प्राथमिकता क्षेत्र के तहत 9.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण संभावित है। इसमें से करीब 34 प्रतिशत यानी 3.12 लाख करोड़ रुपये कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए तय किए गए हैं।
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रिपोर्ट बताती है कि कृषि ऋण का बड़ा हिस्सा अब भी फसल उत्पादन के लिए ही जा रहा है। अकेले फसल ऋण के लिए 2.14 लाख करोड़ रुपये की संभाव्यता आंकी गई है, जो कुल कृषि ऋण का लगभग 80 प्रतिशत है। नाबार्ड ने इसे चुनौती बताते हुए कहा है कि इससे परिसंपत्ति निर्माण और उत्पादकता में अपेक्षित तेजी नहीं आ पाती।
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कृषि निवेश को बढ़ाने पर जोर देते हुए मशीनीकरण, सिंचाई और पशुपालन के लिए अधिक ऋण देने की सिफारिश की गई है। निवेश ऋण फिलहाल 55,579 करोड़ प्रस्तावित है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में कुल कृषि ऋण में निवेश ऋण की हिस्सेदारी करीब 31 प्रतिशत ही है, जबकि राष्ट्रीय औसत 40 प्रतिशत से अधिक है।
डेयरी सबसे बड़ा सब-सेक्टर
डेयरी क्षेत्र सबसे बड़ा उप-क्षेत्र बनकर उभरा है, जिसके लिए 22,102 करोड़ रुपये का ऋण अनुमानित है। इसके अलावा कृषि मशीनरी के लिए 11946 करोड़, पोल्ट्री के लिए 4632 करोड़, मत्स्य पालन के लिए 1532 करोड़ और भेड़-बकरी व सुअर पालन के लिए 3732 करोड़ का ऋण अनुमानित है। वहीं, कृषि अवसंरचना के लिए 20,092.80 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें गोदाम, साइलो, कोल्ड स्टोरेज पर खास जोर है।
फूड प्रोसेसिंग से मजबूत होगी खेती
नाबार्ड की रिपोर्ट के अनुसार कृषि से जुड़ी गतिविधियों, विशेषकर फूड प्रोसेसिंग के लिए 22,088 करोड़ रुपये के ऋण की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश देश में कृषि उत्पादन में आगे होने के बावजूद केवल करीब 6 प्रतिशत फसल का ही प्रसंस्करण हो पा रहा है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार और बैंक प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने और ओडीओपी मॉडल से किसानों को जोड़ने पर जोर दे रहे हैं।