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यूपी: प्रदेश के खजाने में सबसे ज्यादा राजस्व शराब बिक्री से, पेट्रोल-डीजल से हुई कमाई को भी पीछे छोड़ा

Sun, 18 Jan 2026 09:37 AM IST
रोहित मिश्र अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 18 Jan 2026 09:37 AM IST
सार

Liquor sales in UP: यूपी में राजस्व के मामले में आबकारी विभाग नंबर एक पर हो गया है। 2024-25 के आंकड़ों में आबकारी विभाग से आने वाला राजस्व सभी विभागों से आगे है। 

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UP: Liquor sales generate the highest revenue for the state treasury, surpassing even petrol and diesel sales;
यूपी के राजस्व में आबाकारी विभाग अव्वल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 प्रदेश के कर राजस्व आंकड़ों ने वर्ष 2024-25 में चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। राज्य के खजाने में सबसे तेज बढ़त शराब से मिले कर की रही। आबकारी राजस्व ने पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन जैसे बड़े राजस्व स्रोतों को भी पीछे छोड़ दिया। राज्य कर विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक शराब से वैट संग्रह में 62.32 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई जबकि ईंधन क्षेत्र की रफ्तार इसके मुकाबले काफी धीमी रही।
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वर्ष 2023-24 की तुलना में 2024-25 (अस्थायी आंकड़े) में शराब से वैट संग्रह 14.70 करोड़ रुपये से बढ़कर 23.86 करोड़ रुपये हो गया। यानी महज एक साल में इसमें 62.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके उलट पेट्रोल से मिलने वाला राजस्व 9275.31 करोड़ रुपये से बढ़कर 10108.09 करोड़ रुपये पहुंचा जिसकी वृद्धि दर 8.98 प्रतिशत रही। डीजल के मामले में हालात और भी सुस्त रहे। हाईस्पीड डीजल से राजस्व 16927.65 करोड़ रुपये से बढ़कर 17093.26 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन वृद्धि दर सिर्फ 0.98 प्रतिशत रही।
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प्राकृतिक गैस से मिलने वाले कर में भी मामूली बढ़ोतरी हुई। यह 4765.72 करोड़ से बढ़कर 4826.95 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें सिर्फ 1.28 प्रतिशत की बढ़त हुई। विमान टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) से कर संग्रह 21.61 करोड़ रुपये से बढ़कर 24.86 करोड़ रुपये हुआ जिसमें 15.03 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यह ईंधन श्रेणियों में सबसे तेज बढ़त रही, फिर भी शराब कर की रफ्तार के सामने यह भी काफी पीछे रह गई। यदि पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन, इन सभी ईंधन श्रेणियों को एक साथ देखा जाए तब भी शराब से मिलने वाले राजस्व की वृद्धि दर सबसे ज्यादा रही।
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इस तरह देखें तो राज्य की अर्थव्यवस्था में आबकारी कर सबसे मजबूत चालक बनकर उभरा है। कुल वैट संग्रह की बात करें तो वर्ष 2024-25 में वैट वस्तु संग्रह 32077.02 करोड़ रुपये रहा जो पिछले वर्ष के मुकाबले 3.46 प्रतिशत अधिक है। वहीं, शुद्ध वैट संग्रह बढ़कर 32096.54 करोड़ रुपये पहुंच गया जिसमें 3.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि समग्र वृद्धि सीमित रही, लेकिन शराब क्षेत्र ने इसमें सबसे ज्यादा योगदान दिया।
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नीति में बदलाव और वसूली व्यवस्था दुरुस्त होने का असर

आबकारी विभाग की भूमिका भी इस दौरान और मजबूत हुई है। वर्ष 2024-25 में कर और करेतर राजस्व में आबकारी विभाग ने 52574.52 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जो कुल राजस्व का 23.29 प्रतिशत है। वहीं, राज्य कर विभाग ने 114637.54 करोड़ रुपये के साथ 50.79 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इस तरह कुल राजस्व ढांचे में आबकारी विभाग जीएसटी के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। राजस्व विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोग में बढ़ोतरी, नीति में बदलाव और बेहतर वसूली व्यवस्था से शराब से मिलने वाले कर में उछाल आया है। साफ है कि कर वृद्धि की दौड़ में शराब ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे पारंपरिक मजबूत स्रोतों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना दिया है।

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