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यूपी : केजीएमयू में बिना चीरा निकलेगी किडनी की पथरी, 'रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी तकनीक' से होगा इलाज

Fri, 21 Nov 2025 07:55 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Fri, 21 Nov 2025 07:55 PM IST
सार


केजीएमयू में बिना चीरा लगाए रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी तकनीक से किडनी की पथरी निकालने की आधुनिक सुविधा शुरू हो गई है। इस रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी तकनीक' प्रक्रिया में एंडोस्कोप और लेजर से पथरी तोड़कर बाहर निकाली जाती है, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो जाता है।
 

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UP: KGMU to remove kidney stones without incision, using 'retrograde intrarenal surgery technique'
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बिना चीरा किडनी की पथरी निकालने की सुविधा शुरू हो गई है। यूरोलॉजी विभाग में रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी तकनीक से कई ऑपरेशन किए जा चुके हैं।

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यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अपुल गोयल ने बयाया कि रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी (आरआईआरएस) गुर्दे की पथरी निकालने की एक न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया है। परंपरागत तकनीक में पथरी निकालने के लिए किडनी में चीरा लगाना पड़ता है। इस वजह से छोटी पथरी निकालने के बजाय लोग इसे अनदेखा करते रहते हैं। ऐसे में आरआईआरएस तकनीक काम आती है।
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इस तकनीक में एक लचीले एंडोस्कोप को मूत्रमार्ग और मूत्राशय के माध्यम से गुर्दे तक पहुंचाया जाता है। इसमें कोई चीरा नहीं लगाना पड़ता है। इसके बाद पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने के लिए लेजर या अन्य उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। इन टूटे टुकड़ों को प्रेशर के साथ बाहर खींच लिया जाता है। इसके साथ ही पेशाब को निकालने के लिए एक अस्थायी स्टेंट लगाया जा सकता है। दो सप्ताह बाद इसे निकाल दिया जाता है।

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नेवी में जाने के लिए मिला प्रमाणपत्र

डॉ. अवनीत गुप्ता ने बताया कि इसी महीने नेवी में काम करने वाले व्यक्ति की सर्जरी की गई। उनकी किडनी में तीन मिलीमीटर की पथरी थी। छोटी पथरी की वजह से उनको चीरा नहीं लगाया जा रहा था। समस्या यह थी कि पथरी होने से उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था। इस तकनीक से उनकी सर्जरी की गई और पथरी निकाल दी गई। अब वे अपनी नौकरी पर चले गए हैं।

कम बहता है खून

इस प्रक्रिया में खून बहुत कम बहता है। इसकी वजह से जटिलताएं कम होती हैं। मरीज जल्द ही अपने काम पर लौट आता है।


 

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