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एमएसएमई से रोजगार देने वाला यूपी देश का पांचवा सबसे सफल राज्य, आरबीआई ने जारी की रिपोर्ट
Tue, 03 Nov 2020 11:47 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Nov 2020 11:47 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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रोजगार और आर्थिक मोर्चे पर योगी सरकार ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एमएसएमई सेक्टर के जरिए सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला यूपी देश का पांचवा सबसे सफल राज्य बन गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से तैयार की गई रैंकिंग में कई राज्यों को पीछे छोड़ उतर प्रदेश ने शीर्ष 5 में जगह बनाई है।
आरबीआई ने देश के सभी राज्यों का आकलन कर एमएसएमई सेक्टर में रोजगार की रिपोर्ट तैयार की है। एमएसएमई के जरिए रोजगार सृजन के मामले में राजस्थान, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्य यूपी से पीछे हैं। आरबीआई ने कोरोना के संकट काल में योगी सरकार के रोजगार सृजन के आंकड़ों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है।
रिजर्व बैंक की रैंकिंग में महाराष्ट्र, तमिलनाड, गुजरात और मध्य प्रदेश के बाद उतर प्रदेश का नंबर है। कोरोना की विपरीत परिस्थितियों में दूसरे राज्यों में फंसे 40 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का बड़ा फैसला लेने के साथ ही योगी सरकार ने उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती भी पूरी की।
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योगी सरकार ने 20 लाख से ज्यादा मजदूरों की स्किल मैपिंग कराकर उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार से जोड़ा। सरकार ने फिक्की और आईआईए के साथ छह लाख मजदूरों को रोजगार से जोड़ने का एमओयू साइन किया। लघु उद्योग भारती जैसे संस्थानों के साथ 5 लाख रोजगार सृजन का एमओयू कर कुल 11 लाख लोगों को निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने का काम किया।
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आरबीआई ने देश के सभी राज्यों का आकलन कर एमएसएमई सेक्टर में रोजगार की रिपोर्ट तैयार की है। एमएसएमई के जरिए रोजगार सृजन के मामले में राजस्थान, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्य यूपी से पीछे हैं। आरबीआई ने कोरोना के संकट काल में योगी सरकार के रोजगार सृजन के आंकड़ों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है।
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रिजर्व बैंक की रैंकिंग में महाराष्ट्र, तमिलनाड, गुजरात और मध्य प्रदेश के बाद उतर प्रदेश का नंबर है। कोरोना की विपरीत परिस्थितियों में दूसरे राज्यों में फंसे 40 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का बड़ा फैसला लेने के साथ ही योगी सरकार ने उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती भी पूरी की।
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योगी सरकार ने 20 लाख से ज्यादा मजदूरों की स्किल मैपिंग कराकर उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार से जोड़ा। सरकार ने फिक्की और आईआईए के साथ छह लाख मजदूरों को रोजगार से जोड़ने का एमओयू साइन किया। लघु उद्योग भारती जैसे संस्थानों के साथ 5 लाख रोजगार सृजन का एमओयू कर कुल 11 लाख लोगों को निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने का काम किया।
प्रदेश में एमएसएमई की 90 लाख इकाइयां संचालित हैं, जोकि देश में एक रिकॉर्ड है। कोरोना संकट के दौर में योगी सरकार की एक जिला-एक उत्पाद योजना रोजगार के मामले में गेमचेंजर साबित हुई। एमएसएमई के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना के जरिए राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार के साथ ही व्यापार से भी जोड़ा।
ओडीओपी के तहत हर जिले के एक उत्पाद को ब्रांड बनाकर राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग की। अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के साथ सरकार के ऑनलाइन व्यापार के एमओयू ने योजना को गति दी। बड़े जिलों के साथ जौनपुर, एटा, पीलीभीत, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ जैसे छोटे जिले भी ओडीओपी योजना के साथ रोजगार के केंद्र बन गए।
ओडीओपी के तहत हर जिले के एक उत्पाद को ब्रांड बनाकर राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग की। अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के साथ सरकार के ऑनलाइन व्यापार के एमओयू ने योजना को गति दी। बड़े जिलों के साथ जौनपुर, एटा, पीलीभीत, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ जैसे छोटे जिले भी ओडीओपी योजना के साथ रोजगार के केंद्र बन गए।