यूपी: खेतों में बिजली टॉवर लगाने पर अब मिलेगा दोगुना मुआवजा, इस तरह से ले सकते हैं ज्यादा से ज्यादा मुनाफा
Electricity towers in fields: यूपी में खेतों में लगने वाले बिजली टॉवरों पर सरकार ने मिलने वाले मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है।
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विस्तार
प्रदेश में उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन द्वारा 765/ 400/ 220/ 132 केवी पारेषण लाइनों के लिए खेत में टॉवर लगाए जाते हैं। इन टावरों के नीचे आने वाली जमीन का मुआवजा अभी तक टावर बेस था। क्षतिपूर्ति सिर्फ टॉवर के नीचे आने वाली जमीन का ही मिलता था। टॉवर के आसपास की जमीन (आरओडब्ल्यू कारिडोर) के लिए अलग से मुआवजा का प्रावधान नहीं था। अब इसमें बदलाव किया गया है। टॉवर के आसपास 200 प्रतिशत क्षेत्रफल (चारों तरफ एक मीटर अतिरिक्त भूमि) ली जाएगी। राइट ऑफ वे के कारिडोर के 30 प्रतिशत क्षेत्रफल भूमि की लागत के रूप में क्षतिपूर्ति दी जाएगी। भूमि मुआवजे की लागत की गणना उस क्षेत्र विशेष के जिलाधिकारी के द्वारा निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार की जायएगी। इससे किसानों को फायदा मिलेगा।
इस तरह मिलेगा मुआवजा
अब टावर (खंभे) के नीचे आने वाली जमीन पर किसानों को 200% यानी जमीन की कीमत का दोगुना मुआवजा मिलेगा। इसके साथ ही जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर), वहां जमीन की कीमत का 30% मुआवजा दिया जाएगा। कुल मिलाकर 21% से 33% तक अधिक लाभ मिलने का अनुमान है। 2018 से पहले टावर के नीचे या लाइन के कॉरिडोर में आने वाली जमीन पर प्रायः कोई मुआवजा नहीं मिलता था। 2018 में कुछ सुधार हुआ और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया, लेकिन लाइन के नीचे (कॉरिडोर) आने वाली जमीन के लिए तब भी कोई व्यवस्था नहीं थी।
सड़क निर्माण के आड़े नहीं आएगी तारकोल के दाम में वृद्धि
इसलिए कैबिनेट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत मूल्य समायोजन के प्रस्ताव को स्वीकृत किया है। इस निर्णय के तहत लोक निर्माण विभाग के वे सभी कार्य जिनकी निविदा 1 अप्रैल 2026 से पहले मांगी की गई थी, अब मूल्य समायोजन के दायरे में आएंगे। इसमें 5 करोड़ रुपये से कम और इससे अधिक, दोनों ही श्रेणियों के वे अनुबंध शामिल होंगे, जिनमें पहले मूल्य वृद्धि देय नहीं थी।
सरकार के इस कदम से प्रदेश में बिटुमिन से संबंधित निर्माण कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और सड़कों के निर्माण कार्य में तेजी आएगी। इस नीतिगत निर्णय से न केवल ठेकेदारों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं भी समय सीमा के भीतर पूरी हो सकेंगी।
भर्ती व पदोन्नति के लिए पदों की गणना के लिए चयन वर्ष बदला
कैबिनेट यूपी में भर्ती और पदोन्नति के लिए रिक्तियों की गणना के लिए चयन वर्ष बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। चयन वर्ष अब एक जनवरी से 31 दिसंबर माना जाएगा। पहले एक जुलाई से 30 जून चयन वर्ष था। इसके लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती का वर्ष की परिभाषा का प्रतिस्थापन) नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी गई है।
प्रदेश सरकार ने अधिक पदों पर भर्ती और पदोन्नति देने के लिए चयन वर्ष का बदलाव किया है। विभाग चयन वर्ष के आधार पर ही रिक्त पदों की गणना करते हैं। रिक्तियों की गणना के आधार पर ही भर्तियों के लिए आयोगों को प्रस्ताव भेजा जाता है और पदोन्नति के आरक्षित पदों पर पदोन्नतियां दी जाती हैं। कार्मिक विभाग ने चयन वर्ष पहले एक जुलाई से 30 जून तय कर रखा था। विभागों द्वारा इसके आधार पर रिक्त होने वाले पदों की गणना की जा रही थी। राज्य सरकार का मानना है कि जब कैलेंडर वर्ष एक जनवरी से 31 दिसंबर है, तो चयन वर्ष भी इसके आधार पर ही तय होना चाहिए। इसीलिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती का वर्ष की परिभाषा का प्रतिस्थापन) नियमावली में संशोधन करते हुए इसे नए सिरे से मंजूरी दी गई है। नियमावली में संशोधन संबंधी आदेश जारी होने के बाद नए चयन वर्ष के आधार पर पदों की गणना शुरू की जाएगी।