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यूपी: आटो एप्रूव्ड में भी अपात्रों को मिली फसल बीमा की राशि, रोकने के लिए सरकार बना रही नई व्यवस्था

Mon, 05 Jan 2026 07:41 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Mon, 05 Jan 2026 07:41 PM IST
सार

प्रदेश में आटो एप्रूव्ड सिस्टम के चलते अपात्र किसानों को भी फसल बीमा क्लेम मिलने का मामला सामने आया है। करोड़ों रुपये के घपले के बाद सरकार ने हर चरण में सत्यापन का फैसला लिया है। 

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UP: Ineligible beneficiaries also received crop insurance payments through the auto-approval system; the gover
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रदेश के विभिन्न जिलों में फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना में तमाम किसानों को आटो एप्रूव्ड सिस्टम की वजह से भी बीमा क्लेम चला गया है। भविष्य में इस तरह की गलती न हो, इसके लिए हर चरण में सत्यापन की व्यवस्था बनाई जा रही है।

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प्रदेश में महोबा, झांसी, ललितपुर, मथुरा, फर्रुखाबाद सहित विभिन्न जिलों में फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना में करोड़ों रुपये का घपला हुआ है। इस मामले में महोबा, झांसी और फर्रुखाबाद में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। 
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विभागीय जांच में घपले में हुई चूक के हर बिंदू पर फोकस किया जा रहा है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि तमाम किसानों को एक किश्त देने के बाद दूसरी बार आटो एप्रूव्ड सिस्टम की वजह से क्लेम चला गया है। 
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हर मौसम में बीमा कवरेज प्राप्त होने के उपरांत बीमा पालिसियों को बीमा कंपनी द्वारा स्वीकार करने की कार्यवाही की जाती है। गैर ऋणी किसानों के बीमा प्रपत्रों, चकबन्दी / सर्वे में शामिल गावों की बीमा पालिसियों की जांच में अत्यधिक समय लगता है। कभी-कभी जांच के पहले ही भारत सरकार द्वारा पोर्टल पर बीमा पालिसियों को आटो एप्रूव्ड कर दिया जाता है। 

ऐसे में अपात्र बीमा पालिसी भी एप्रूव्ड हो जाती है। ऐसे में बीमा कंपनियों द्वारा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अपात्र किसानों को क्षतिपूर्ति का भुगतान हो जाता है। 

इस तरह की शिकायतों को देखते हुए अब आटो अप्रूव्ड न करने का फैसला लिया गया है। जिला स्तर पर यह व्यवस्था बनाई जा रही है कि टीम बनाकर बीमा पालिसियों की जांच कराई जाए। फसल सीजनवार जिला स्तर से स्वीकृत होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

 

ज्यादातर घपला सीएससी से हुआ

जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि मुख्यतया गैर ऋणी कृषकों का बीमा कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से होता है। इन सेंटरों द्वारा बीमा करते समय किसान से संबंधित दस्तावेज लिए जाते हैं।  किसानों के आधार संख्या, खसरा खतौनी की प्रति, बटाईदार/किरायेदार के रूप में भूमि मालिक के साथ हुए अनुबन्ध की प्रति. फसल बुवाई संबंधित स्वलिखित प्रमाण पत्र, बैंक पास बुक अपलोड किया जाता है। 

दस्तावेजों में हेरफेर करके इसे अपलोड किया गया है। इसी तरह भू-अभिलेख के डाटा को एनसीआईपी पोर्टल से इन्ट्रीगेट किया गया है, जिससे बीमा कराते समय किसान के पास उपलब्ध भूमि का सत्यापन हो जाता है। लेकिन, जिन गांवों में चकबंदी चल रही है अथवा चकबंदी के लिए सर्वे में शामिल हैं, उन गांवों का भूमि संबंधी डाटा का सत्यापन पोर्टल पर नहीं हो पाता है। मनमानी करने वालों ने इसका फायदा उठाया। यही वजह है कि जहां बड़े पैमाने पर घपले हुए हैं, वे गांव चकबंदी में शामिल हैं।

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