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यूपी : हाईकोर्ट का निर्देश...प्रदेश के बालगृह चलाने वाली संस्थाओं को समय से कोष दें, पेश हुए अफसर

Fri, 12 Dec 2025 07:23 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Fri, 12 Dec 2025 07:23 PM IST
सार

लखनऊ हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि बालगृह चलाने वाली संस्थाओं को बिना देरी के समय पर धनराशि जारी की जाए, ताकि बच्चों के कल्याण में बाधा न आए।

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UP: High Court directs... Provide funds to institutions running children's homes in the state on time, officer
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार के अफसरों को निर्देश दिया कि बच्चों के बाल गृह चलाने वाली सामाजिक संस्थाओं को समय से कोष जारी करने की प्रक्रिया अपनाएं। कोर्ट ने संबंधित अफसरों से अपेच्छा की कि उनके स्तर से इन संस्थाओं को धनराशि जारी करने की सभी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया अनावश्यक देरी किए बगैर पटरी पर लाई जाए। जिससे संस्थाओं को समय से कोष जारी हो सके। सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के अफसर भी पेश हुए।

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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह यह आदेश वर्ष 2008 में दाखिल अनूप गुप्ता की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में प्रदेश के बालगृहों में रहने वाले बच्चों के कल्याण का मुद्दा उठाया गया है। साथ ही बालगृहो की खस्ता हालत में सुधार के लिए इनको चलाने वाली संस्थाओं को समय पर धनराशि मुहैया कराने का भी आग्रह किया गया था। 

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संस्थाओं को 60 प्रतिशत कोष केंद्र सरकार देती है

मामले की सुनवाई के दौरान कहा गया कि इन संस्थाओं को 60 प्रतिशत कोष केंद्र सरकार देती है, बाकी 40 प्रतिशत, राज्य सरकार को देना होता है। इसको लेकर संस्थाओं को कोष उपलब्ध होने में देरी होती है, जिससे बालगृहो का संचालन मुश्किल में फांस जाता है। बीते बृहस्पतिवार को महिला एवं बाल कल्याण निदेशालय यूपी के उपनिदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने कोर्ट को बताया कि केंद्र द्वारा दी जाने वाली धनराशि का हिस्सा प्राप्त हो चुका है। 

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जिसे दृष्टि सामाजिक संस्थान और गोंडा की ग्रामीण विकास समिति चारु द्वारा चलाए जा रहे बालगृहों को देने में उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दृष्टि सामाजिक संस्थान का शेष कोष 15 दिन में जारी कर दिया जाएगा। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन वात्सल्य की निदेशक अरकजा दास भी उपस्थित हुईं और कोर्ट को जानकारी दी। कोर्ट ने आदेश देकर मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को नियत की है।

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