फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: High Court asked the central and state government- what measures are you taking to stop caste rallies? Ans

यूपी: हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा- जातीय रैली रोकने के क्या उपाय कर रहे हैं? देना होगा जवाब

Wed, 03 Sep 2025 09:07 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 03 Sep 2025 09:07 PM IST
सार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जातीय रैलियों पर रोक के मामले में केंद्र व राज्य सरकार से पूछा है कि दोनों सरकारें जातीय रैलियां रोकने को क्या उपाय कर रही हैं।

विज्ञापन
UP: High Court asked the central and state government- what measures are you taking to stop caste rallies? Ans
लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जातीय रैलियों पर रोक के मामले में केंद्र व राज्य सरकार से पूछा है कि दोनों सरकारें जातीय रैलियां रोकने को क्या उपाय कर रही हैं? कोर्ट ने दोनों को जवाब दाखिल करने का समय देकर अगली सुनवाई अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में नियत की है। पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार को मामले में जवाब पेश करने का मौका दिया था। साथ ही कोर्ट ने याची को भी पिछले 10 साल में राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित की गई जातीय रैलियों का ब्योरा नए हलफनामे पर दाखिल करने को कहा था।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया। पहले, इस मामले में कोर्ट ने पक्षकारों केंद्र व राज्य सरकार समेत केंद्रीय निर्वाचन आयोग एवं चार राजनीतिक दलों कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने यह याचिका वर्ष 2013 में दायर की थी। उसका कहना था कि उत्तर प्रदेश में जातियों पर आधारित राजनीतिक रैलियों की बाढ़ आ गयी है। सियासी दल ब्राहमण रैली, क्षत्रिय रैली, वैश्य सम्मेलन आदि नाम देकर अंधाधुंध जातीय रैलियां कर रहे हैं। जिनपर रोक लगाई जानी चाहिए।
विज्ञापन


दरअसल, 11 जुलाई 2013 को कोर्ट ने को एक अहम आदेश में पूरे उत्तर प्रदेश में जातियों के आधार पर की जा रही राजनीतिक दलों की रैलियों पर तत्काल रोक लगा दी थी। साथ ही इन पक्षकारों को नोटिस जारी की थी। याची का तर्क था कि इससे सामाजिक एकता और समरसता को जहां नुकसान हो रहा है वहीं, ऐसी जातीय रैलियां तथा सम्मेलन समाज में लोगों के बीच जहर घोलने का काम कर रहे हैं, जो संविधान की मंशा के खिलाफ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गौरतलब है कि 2013 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बसपा ने प्रदेश के करीब 40 जिलों में ब्राहमण भाईचारा सम्मेलन आयोजित किये थे। उसके अलावा सपा ने भी पहले लखनऊ में ऐसा ही सम्मेलन किया था। साथ ही उसने मुस्लिम सम्मेलन भी आयोजित किये थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed