UP: अग्निकांड के बाद दर्दनाक मंजर, राख के बीच हुई वरमाला की रस्म, खुले आसमान तले गुजरी रातें; टूट गए सारे सपने
विकासनगर की आग ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। झोपड़ियां, सामान और जरूरी दस्तावेज जल गए। एक युवक ने शादी के दिन उधार कपड़ों में वरमाला की रस्म निभाई। पीड़ित खुले आसमान के नीचे राहत का इंतजार कर रहे हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है।
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विकासनगर की उस बस्ती में धुआं थम चुका है, लेकिन दर्द अब भी सुलग रहा है। बुधवार की आग ने सिर्फ झोपड़ियां नहीं जलाईं। इसने लोगों की पूरी जिंदगी, उनकी मेहनत, रिश्ते और सपनों को राख में बदल दिया। बृहस्पतिवार को यहां का मंजर और भी ज्यादा मार्मिक था। राख के ढेर में झुके लोग अपने हिस्से की जिंदगी तलाश रहे थे। कोई बेटे-बेटी की अधजली किताबें समेट रहा था तो कोई घर-गृहस्थी के बचे-खुचे निशान खोज रहा था।
इस बस्ती में रहने वाले ज्यादातर परिवार मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। वर्षों की मेहनत से जोड़ा गया गृहस्थी का सामान चंद मिनटों में राख हो गया। किसी की बाइक जलकर राख हो गई, तो किसी के मवेशी असमय काल के गाल में समा गए। आग ने सिर्फ सामान नहीं, पहचान भी छीन ली।
करीब 95 प्रतिशत लोगों के आधार कार्ड, बैंक पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस, बाइक-स्कूटी के कागजात और जरूरी दस्तावेज जलकर खत्म हो गए। पीड़ितों ने बताया कि आग इतनी भयावह थी कि तन पर पहने कपड़े के अलावा वह घर से कुछ भी सामान बाहर नहीं निकाल सके।
साले के कपड़े पहनकर अदा की वरमाला की रस्म
पीड़ित रेशमा ने बताया कि उनके बेटे मनीष की बुधवार रात शादी थी। बरात की तैयारी चल रही थी। उबटन की रस्म अदा की जा रही थी। आग लगी तो सारी खुशियां काफूर हो गईं। सभी जान बचाकर भागे। मनीष सिर्फ अंडरवियर पहने था। शरीर पर उबटन लगा था।
बरात मुंशी पुलिया के निकट पानी गांव निवासी स्व. मतलेश की पुत्री मधु से होनी थी। रेशमा ने बताया कि मनीष के साले की तीन वर्ष पहले शादी हुई थी। उसके कपड़े घर में रखे थे। लड़की वालों ने वही कपड़े मनीष को पहनाकर जयमाला की रस्म अदा की।
इसी बस्ती के लालता प्रसाद अपनी किस्मत को कोसते नजर आए। उनके बड़े बेटे सोनू की शादी 26 अप्रैल को तय है। डालीगंज निवासी परिवार से होने वाली इस शादी के लिए बहू के लिए जेवर, कपड़े और अन्य सामान पहले से जुटाकर रखे गए थे, जो आग में जल गए।
बच्चों की पढ़ाई भी छिनी
माया देवी और उनके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी बड़ी बेटी संगीता इंटर में पढ़ती है। रोशनी कक्षा छह में और बेटा ऋतिक एलकेजी में है। तीनों बच्चों की किताबें, कॉपियां, स्कूल का सामान, यहां तक कि शैक्षिक प्रमाणपत्र और आधार कार्ड भी आग में जल गए। अब पढ़ाई कैसे शुरू होगी, यह सबसे बड़ी चिंता है। ऐसा लगभग सभी परिवारों के साथ हुआ। प्रशासन की ओर से ऐसे परिवारों के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
खुले आसमान के नीचे...राहत का इंतजार
दूसरे दिन तपती धूप में खुले आसमान के नीचे बैठे ये परिवार भूखे-प्यासे राहत का इंतजार करते रहे। पीड़ित सूबेदार, लालता, अनिकेत आदि ने बताया कि तहसील प्रशासन और कुछ पुलिसकर्मी सुबह पीड़ित परिवारों के नाम नोट कर ले गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं उपलब्ध कराई गई। आसपास के लोग ही इस समय इनका सहारा बने हुए हैं। कोई खाना दे रहा है, कोई पानी और बच्चों के लिए बिस्किट।