सरकार की धमकी, मिल मालिकों की होगी गिरफ्तारी
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हाईकोर्ट के सख्त रुख और विधानमंडल में विपक्षी दलों के हमले के बाद गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर सरकार ने मिल मालिकों को धमकी दी है।
गन्ना आयुक्त सुभाष चन्द शर्मा ने सोमवार को 19 और चीनी मिलों की आरसी जारी कर दी। इससे पहले 17 मिलों की आरसी जारी हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक इस माह के अंत तक भुगतान में तेजी न आने पर कुछ चीनी मिल मालिकों की गिरफ्तारी हो सकती है।
प्रदेश के चीनी मिलों पर किसानों का पेराई सत्र 2013-14 का 7529 करोड़ रुपया और पेराई सत्र 2012-13 का 44 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। विलंब से गन्ना मूल्य अदा करने पर लगने वाला ब्याज इससे अलग है।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि जिन मिलों के विरुद्ध वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किए गए हैं उनमें इटईमैदा (बलरामपुर), कुंदरखी (गोंडा), चिलवरिया (बहराइच) व रुधौली (बस्ती) मिलें शामिल हैं। गन्ना आयुक्त ने उन जिलों के डीएम से आरसी पर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं जिनका वसूली प्रमाणपत्र जारी हुए हैं।
बजाज की सभी मिलों की आरसी
गन्ना आयुक्त ने अब तक 36 निजी चीनी मिलों की आरसी जारी की है। इनमें बजाज ग्रुप की सभी 15 मिलें, मोदी ग्रुप की दोनों मिलें, सिंभावली ग्रुप की सभी तीन मिलें, मवाना ग्रुप की सभी तीन मिलें, शामली ग्रुप की दोनों मिलें शामिल हैं।
अभी बलरामपुर ग्रुप की किसी मिल के खिलाफ आरसी जारी नहीं हुई है। इस ग्रुप की 11 चीनी मिलें हैं। इस ग्रुप की चीनी मिलों पर किसानों का 537.08 करोड़ रुपया बकाया है।
गन्ना आयुक्त सुभाष चंद शर्मा का कहना है कि भुगतान की समीक्षा करने पर सबसे कम गन्ना मूल्य अदा करने वाली मिलों पर पहले कार्रवाई की जा रही है।
अगले दो-तीन दिनों में अन्य चीनी मिलों ने भुगतान में तेजी न दिखाई तो उनके खिलाफ भी आरसी और एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सदन में भी हावी रहा मुद्दा
बकाया गन्ना मूल्य भुगतान पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट राष्ट्रीय लोकदल के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। रालोद के वीरपाल राठी ने विधानसभा में किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा उठाते हुए सदन की कार्यवाही रोक कर इस पर बहस कराने की मांग की।
उन्होंने कहा, किसानों का पेराई सत्र 2013-14 का साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया हैं। सत्र 2012-13 का भी पूरा गन्ना मूल्य नहीं मिला।
मलकपुर चीनी मिल पर 24 करोड़ रुपये तो ब्याज के ही बकाया हैं। भुगतान न मिलने से किसानों के बच्चों की स्कूल-कॉलेजों की फीस जमा नहीं हो रही है।
सरकार इन किसानों के आश्रित बच्चों को जीरो फीस पर दाखिले की अनुमति दे। उन्होंने कहा कि 17 चीनी मिलों की आरसी जरूर काटी गई है कि लेकिन गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई।
7951 करोड़ रुपये बकाया
राठी ने कहा कि इसी सदन में चौधरी चरण सिंह मुख्यमंत्री थे तो उनकी आवाज कानून होती थी, अखिलेश यादव क्यों कमजोर मुख्यमंत्री साबित हो रहे हैं।
सरकार की ओर से अंबिका चौधरी ने कहा कि बकाया भुगतान दिलाने के लिए सीएम ने बजट में चार सौ करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। उन्होंने बकाया भुगतान शीघ्र कराने का आश्वासन दिया। लेकिन रालोद के सदस्यों ने सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया।
विधान परिषद में भाजपा के महेंद्र सिंह के सवाल पर मुख्यमंत्री की ओर से लिखित जवाब में बताया गया कि चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 19385.89 करोड़ रुपये बकाया था।
इसमें मिलों ने 11434.06 करोड़ रुपया भुगतान कर दिया है। शेष 7951.83 करोड़ रुपये के भुगतान को सरकार प्रयासरत है। जल्द ही भुगतान करा दिया जाएगा।