विकास के एजेंडे पर 'सरकार' का फरमान जारी
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मुख्य सचिव आलोक रंजन ने शासन व फील्ड के अफसरों को वित्त वर्ष 2015-16 के विकास एजेंडे पर सर्वोच्च प्राथमिकता से कार्यवाही का निर्देश दिया है।
उन्होंने सरकार के विकास एजेंडे के 165 कार्यों में से 47 की समीक्षा की जिम्मेदारी मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को भी सौंपी है।
अफसरों को स्पष्ट कर दिया गया है कि उनकी उपलब्धियों का आकलन करते समय एजेंडे की सफलता को भी ध्यान में रखा जाएगा।
प्रदेश सरकार ने सूबे के विकास कार्यों का एजेंडा काफी पहले ही तैयार करवा दिया था। अब इस पर तेजी से अमल को लेकर मुख्य सचिव ने विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्य सचिव ने एजेंडे में शामिल नए व पूर्व के कार्यों पर कार्रवाई व उसकी समीक्षा को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश दिए हैं। जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को अपने स्तर पर की गई समीक्षा की विस्तृत रिपोर्ट शासन को देनी होगी।
जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को माह में एजेंडे की एक बैठक करने की जगह अपनी सुविधानुसार माह में सेक्टरवार बैठकें करने को कहा गया है।
मुख्य सचिव ने हिदायत दी है कि विकास एजेंडा वर्ष में समस्त विकास कार्यों का केंद्र बिंदु है। इसका क्रियान्वयन शीर्ष प्राथमिकता पर होना चाहिए।
एजेंडा बिंदुओं पर जिला व मंडल स्तर पर हासिल की गई प्रगति संबंधित डीएम व कमिश्नर की उपलब्धियों में शामिल होगी। वार्षिक मूल्यांकन करते समय भी इसे ध्यान में रखा जाएगा।