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मदरसों की जांच करवा रही है अखिलेश सरकार

Mon, 10 Nov 2014 01:18 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 10 Nov 2014 01:18 AM IST
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UP govt is doing investigation about Madarsas.

पिछले ढाई साल से अनुदान की राह देख रहे यूपी के मदरसों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। प्रदेश सरकार एक बार फिर मदरसों के प्रस्तावों का परीक्षण करा रही है। यह जिम्मा अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय को सौंपा गया है।

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यह परीक्षण इसलिए हो रहा है ताकि यह देखा जा सके कि अनुदान के लिए सरकार ने जो मानक शिथिल किए हैं उसके अनुसार अब कितने मदरसे फिट बैठ रहे हैं। परीक्षण पूरा होने के बाद निदेशालय सरकार के पास प्रस्ताव भेजेगा। इसके बाद ही मदरसों को अनुदान देने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
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प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबसे पहले सूबे के 146 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी। इन्हें दो वित्तीय वर्ष में अनुदान दिया जाना था लेकिन ढाई साल बाद भी मदरसों को अनुदान नहीं मिल सका।
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प्रदेश सरकार ने जब प्रस्ताव मांगे तो उसे 194 मदरसों के प्रस्ताव मिले। इनमें से ज्यादातर मानकों को पूरा नहीं करते थे। इसके बाद सरकार ने अनुदान देने के लिए मानकों में ढील दे दिया। इसलिए अब फिर से प्रस्तावों का परीक्षण किया जा रहा है।

कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव

UP govt is doing investigation about Madarsas.

शासन ने सभी प्रस्ताव अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय भेज दिए हैं। निदेशालय में इनका परीक्षण भी शुरू हो गया है। परीक्षण के बाद ये प्रस्ताव फिर से शासन को भेजे जाएंगे। शासन स्तर पर प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में बनी उच्च समिति में अनुदान देने पर अंतिम निर्णय होगा।

इसके बाद इन प्रस्तावों को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट से अनुमोदन के बाद ही मदरसों को अनुदान मिल सकेगा।

सरकार ने मानकों में दी है यह ढील
1-मदरसों में 13 शिक्षकों में से यदि आठ शिक्षक हैं तो भी उन्हें अनुदान दिया जा सकता है। हालांकि, मदरसों को तीन महीने के भीतर शिक्षकों के रिक्त पद भरने होंगे।

2-मदरसों में शिक्षक भर्ती का विज्ञापन दो अखबारों में प्रकाशित होना चाहिए। इनमें एक स्थानीय अखबार व दूसरा मंडल स्तरीय अखबार होना चाहिए। पहले इसमें दूसरा अखबार राज्य स्तरीय होना जरूरी माना जाता था।

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