पेट्रोल चोरी पर दबाव में सरकार, अब सीधे पंपों पर नहीं होगी कार्रवाई
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लखनऊ में पेट्रोल चोरी के खुलासे और अधिकतर पेट्रोल पंपों पर इस तरह की चोरी की जानकारी होने के बाद भी सरकार अब सीधे पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई नहीं करेगी। सरकार ने हर जिले में पेट्रोल पंपों की जांच के लिए टीमें बनाई हैं।
इन टीमों को चार स्तर पर जांच के लिए कहा गया है। पहले स्तर पर यह देखा जाएगा कि पेट्रोल पंप पर चिप लगी है और तेल की घटतौली हो रही है। ऐसी स्थिति में पेट्रोल पंप मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
दूसरे स्तर पर अगर मशीन में चिप मिलती है लेकिन घटतौली नहीं हो रही है तो मशीन को सील कर दिया जाएगा और चिप डिस्पेंसर के पल्सर यूनिट के सर्किट को निकाल कर जांच के लिए भेजा जाएगा।
तीसरी स्थिति में किसी पेट्रोल पंप पर सील टूटी पाई जाती है या फिर मशीन के अंदर छेड़छाड़ के सुबूत मिलते हैं तो भी संबंधित डिस्पेंसर यूनिट को सील कर दिया जाएगा और पल्सर यूनिट को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। किसी मशीन में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं पाई जाती है तो वह मशीन चालू रहेगी।
एसटीएफ होगी सहायक की भूमिका में
एसटीएफ के आईजी राम कुमार ने बताया कि अब जो भी जांच होगी उसमें एसटीएफ की भूमिका सहयोगी की होगी। किसी को अगर कुछ समझना होगा तो उसके लिए एसटीएफ के अधिकारी उसके लिए उपलब्ध होंगे।
आईजी ने बताया कि हर जिले में छह विभिन्न अधिकारियों की टीम बनाई गई है जो एक एक पेट्रोल पंप की जांच कर रही है।
उन्होंने बताया कि सभी जनपदों के पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तरह से समझा दिया गया है कि किस किस तरह से पेट्रोल चोरी के लिए किन किन स्थानों पर चिप लगी हो सकती है इसकी पूरी जानकारी दे दी गई है।
आईजी ने बताया कि सिर्फ मशीन में ही नहीं टैंक में भी चिप लगे होने के बारे में बताया गया है।