सरकार ने खर्च घटाने, सुशासन बढ़ाने पर शुरू किया मंथन, पूर्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित
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उत्तर प्रदेश सरकार अपने कामकाज में खर्च घटाने के साथ कार्मिकों की दक्षता में सुधार करेगी। साथ ही सार्वजनिक सेवाओं के संबंध में पब्लिक फीडबैक को अधिकारियों व संबंधित कार्यालयों के मूल्यांकन का हिस्सा बनाने और नवीनतम तकनीक व डिजिटल गवर्नेंस को अपनाकर शासन व्यवस्था में सुधार पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस संबंध में सुझाव के लिए पूर्व मुख्य सचिव व यूपी रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार की अध्यक्षता में गठित समिति को इसका जिम्मा सौंपा गया है।
कमेटी को मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर सुझाव देने को कहा गया है। पहला, विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या का रेशनलाइजेशन (युक्तिकरण), दूसरा- अधिकारियों व कर्मचारियों को अधिक प्रभावी व दक्ष बनाना, तीसरा- अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रभावशीलता व दक्षता के आकलन की व्यवस्था और चौथा- डिजिटल गवर्नेंस बनाने के संबंध में सुझाव देना है।
समिति ने पहली बैठक में सभी विभागों से आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए एक प्रश्नावली तैयार की। इसे सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को भेजकर 10 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके बाद समिति विभागीय अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों के समूह के साथ बैठक करेगी। इसके बाद अपनी संस्तुतियां सरकार को सौंपेगी।
सरकार यह पता लगाना चाहती है कि कार्य के हिसाब से कहां कर्मियों की संख्या सीधे तौर पर कम की जा सकती है? किस तरह के काम बाहरी एजेंसियों को देकर खर्च कम किया जा सकता है? कहां तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर कर्मचारी कम किए जा सकते हैं? किन-किन मदों के खर्चों में कटौती की जा सकती है?
इस तरह मांगीं विभागों से सूचनाएं
- पत्रावलियों पर निर्णय में कम समय लगे
अफसरों से पत्रावलियों के परीक्षण की वर्तमान पद्धति में सुधार लाने के संबंध में सुझाव मांगा गया है। पूछा गया है कि क्या यह संभव है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले पत्रावलियों का विभिन्न स्तरों से गुजरना कम किया जा सके? उन क्षेत्रों का सुझाव दें, जहां अंतिम निर्णय निचले स्तरों पर लिया जा सकता है।
- कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने पर मंथन
कर्मचारियों को प्रभावी व दक्ष बनाने के संबंध में सुझाव मांगे गए हैं। कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए रणनीति का निर्धारण भी करना है। अफसर बताएंगे कि कार्मिकों को तकनीक का उपयोग करते हुए किस प्रकार प्रभावी व दक्ष बनाया जा सकता है।
- जनसेवाओं से जवाबदेही
विभाग द्वारा संचालित सार्वजनिक क्षेत्रों के सेवाओं की सूची मांगी गई है। पूछा गया है कि उनमें से कितनी लोक सेवा अधिनियम के प्रावधान के अंतर्गत जोड़ दी गई हैं? कौन सी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जाती हैं और कब तक विभाग के सभी सार्वजनिक सेवाओं को डिजिटल रूप दे दिया जाएगा। क्या दी जा रही सार्वजनिक सेवाओं पर आम लोगों की प्रतिक्रिया को शामिल करना अधिकारियों या संबंधित कार्यालय के मूल्यांकन का हिस्सा होना चाहिए?