फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   up government trapped in farmer's loan matter in vidhan sabha

कर्जमाफी की कटऑफ डेट पर विधानसभा में फंसी यूपी सरकार

Fri, 19 May 2017 12:45 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 19 May 2017 12:45 PM IST
विज्ञापन
up government trapped in farmer's loan matter in vidhan sabha
सीएम आद‌ित्यनाथ योगी - फोटो : demo pic

कर्जमाफी की कटऑफ डेट को लेकर सरकार बृहस्पतिवार को विधानसभा में बुरी तरह फंस गई। दरअसल, राज्यपाल राम नाईक द्वारा 15 मई को विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में दिए अभिभाषण में 31 दिसंबर 2016 तक के फसली ऋण को माफ करने की बात कही गई जबकि योगी कैबिनेट ने 31 मार्च 2016 तक के फसली ऋण को माफ करने का फैसला किया है।

विज्ञापन


विधानसभा में बृहस्पतिवार को संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने राज्यपाल के अभिभाषण में शामिल कटऑफ डेट को तकनीकी व टंकण की त्रुटि बताते हुए इसे संशोधित करके 31 मार्च 2016 करने तथा किसानों के स्थान पर लघु एवं सीमांत कृ षक रखने का प्रस्ताव पेश किया।
विज्ञापन


विपक्ष ने संविधान, नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए सरकार के इस प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा दिया। विपक्ष का कहना था कि अभिभाषण में राज्यपाल की अनुमति के बिना कोई संशोधन नहीं किया जा सकता जबकि सरकार का कहना था कि संशोधन के प्रस्ताव के जरिए ऐसा किया जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


संसदीय कार्य मंत्री ने संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि राज्यपाल के  अभिभाषण में पेज तीन पर कर्जमाफी की कटऑफ डेट त्रुटिवश 31 दिसंबर 2016 छप गई है। कैबिनेट ने 4 अप्रैल की बैठक में 31 मार्च 2016 तक के फसली ऋण ही माफ करने का फैसला किया है।

अभिभाषण के पेज पर 31-12-2016 की तारीख को संशोधित करके 31-03-2016 कर दिया जाए। उन्होंने किसान शब्द की जगह लघु एवं सीमांत कृषक रखने का प्रस्ताव भी किया। उनका कहना था टंकण की त्रुटि से ऐसा हुआ है। इसे ठीक कर दिया जाए।

‌ल‌िप‌िकीय त्रुट‌ि सुधारी जाए

up government trapped in farmer's loan matter in vidhan sabha
राज्यपाल रामनाईक - फोटो : demo pic

नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने यह कहते हुए आपत्ति की कि राज्यपाल ने जो अभिभाषण प्रस्तुत किया है, उसे वह (विधानसभा अध्यक्ष) भी पढ़ चुके हैं और उस पर सदस्यों के विचार भी आ चुके हैं।

चौधरी ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष व सरकार का सहयोग करने के लिए कल ही यह बात उठाई थी और सचेत किया था कि अभिभाषण संविधान व नियम के विपरीत है, लेकिन न ये (सरकार) माने न आप (अध्यक्ष) माने।

उन्होंने कहा कि कभी ये परंपरा नहीं रही कि राज्यपाल का अभिभाषण या बजट भाषण को सुधारा जा सके। सदन की बात है। चर्चा हो गई है। इसे ऐसे ही रहने दिया जाए।

कोई मुकदमा तो होने जा नहीं रहा। इससे गलत परंपरा पड़ेगी। मेरा भाषण शुरू होने से पहले बदल देते तो भी ठीक था। अब बीच में यह संभव नहीं है। चौधरी ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री को प्रस्ताव लाने का अधिकार ही नहीं है।


सुरेश खन्ना ने पिछली सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सदस्यों को बांटी गई एक पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि उसमें बहुत सी रूलिंग थीं। उसमें यह भी था कि अगर कोई लिपिकीय त्रुटि हो गई है उसे सुधारा जाए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल संदेश भेजें, यह संभव नहीं है। हम सुधार सकते हैं। 

विधिक राय लेकर करें निर्णय

up government trapped in farmer's loan matter in vidhan sabha
विधान सभा - फोटो : अमर उजाला

राम गोविंद चौधरी ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि पानी सिर से ऊपर जा रहा है। रोज नई परंपरा पड़ेगी? संयुक्त सदन था। अभिभाषण कई विभागों से बनता है, फिर कैबिनेट से पास होता है।

इसके बाद राज्यपाल पढ़ते हैं। कोई संशोधन था तो पहले ही होता। चौधरी ने कहा कि पूरा अभिभाषण वापस हो तथा सत्र कैंसिल करके  पुन: इसे लाया जाए। संशोधन संवैधानिक, नियमानुकूल व परंपरा के अनुकूल नहीं है। 

खन्ना इस पर अड़े रहे कि संशोधन प्रस्ताव के जरिए अभिभाषण में संशोधन किया जा सकता है और सदन को इसका अधिकार है। इसे चुनौती नहीं दी जा सकती जबकि विपक्ष इसे लगातार गलत बता रहा था।

लालजी वर्मा ने नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि अभिभाषण में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। बाद में कुछ जोड़ा जरूर जा सकता है। यह विधिक विषय है। कोई नई पंरपरा न बने इसलिए सरकार को विधिवेत्ताओं की राय लेकर सोच-विचार के बाद निर्णय करना चाहिए।

खन्ना ने कहा कि वह भी नहीं चाहते कोई गलत परंपरा बने, इसलिए महाधिवक्ता की राय तथा अन्य विकल्पों के साथ शुक्रवार को फिर प्रस्ताव पेश कर देंगे। चौधरी ने लोकसभा की नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि संवैधानिक प्रमुख के अभिभाषण में बिना उनकी अनुमति के कोई बदलाव नहीं हो सकता।

दोबारा प्रस्ताव रखने के द‌िए निर्देश

up government trapped in farmer's loan matter in vidhan sabha
सीएम योगी आदित्यनाथ
इस मुद्दे पर लंबी चर्चा के बाद अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सरकार को कानूनी राय तथा अन्य विकल्पों के साथ इस प्रस्ताव को शुक्रवार को दोबारा सदन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जहां तक वह समझ पाए हैं, जब तक अभिभाषण दिया नहीं जाता, तब तक तो संशोधन हो सकता है। सदन में आने के  बाद वह सदन की संपत्ति हो जाता है और सदस्यों को ही संशोधन का अधिकार होता है।

सदस्य संशोधन देते भी हैं। नेता प्रतिपक्ष व नेता बसपा ने विधिक राय लेने का सुझाव दिया है। उन्होंने सरकार को निर्देश दिए कि यह प्रक्रिया पूरी करके शुक्रवार को सदन में दोबारा प्रस्तुत किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed