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यूपी: प्रदेश में बिजली कर्मियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, आंदोलन करने वाले कर्मी बिना जांच होंगे बर्खास्त

Sat, 24 May 2025 09:31 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 24 May 2025 09:31 AM IST
सार

Electricity in UP: 29 मई को यूपी में बिजली के निजीकरण को लेकर होने वाली बिजली कर्मियों की हड़ताल पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ किया है कि कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा सकता है। 
 

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UP: Government takes strict action against electricity workers' strike in the state, protesting workers will b
यूपी में बिजली व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब आंदोलन करने वाले बिजली कर्मियों को बिना जांच के ही बर्खास्त किया जा सकेगा। नियुक्ति प्राधिकारी को बर्खास्तगी के साथ ही पद से हटाने, पदावनति करने का भी अधिकार दे दिया गया है। इसके लिए पावर कार्पोरेशन की कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) विनियमावली 2020 में संशोधन किया गया है।

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पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल के निजीकरण प्रस्ताव को लेकर बिजली कर्मियों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। 29 मई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। ऐसे में पावर कार्पोरेशन निदेशक मंडल की बृहस्पितवार को हुई बैठक में कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2020 में संशोधन कर दिया गया है। अब इसे पावर कार्पोरेशन कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) (पंचम संशोधन) विनियमावली 2025 नाम दिया गया है।
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जांच में लगता है वक्त, हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला

संशोधित विनियमावली में तर्क दिया गया है कि विद्युत व्यवस्था संचालन में बाधा पहुचाने, तोड़फोड़ अथवा आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जांच के दौरान काफी वक्त बीत जाता है। ऐसे में आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। यह भी तर्क दिया गया है कि दिसंबर 2022 में हुई हड़ताल एवं कार्य बहिष्कार के संबंध में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर ऊर्जा विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है। इसी तरह आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू होने के बाद भी हड़ताल पर जाने अथवा हड़ताल की स्थिति उत्पन्न करने, आधारभूत ढांचा प्रभावित करने, विद्युत संयंत्र को क्षति पहुचाने, अन्य कर्मियों को इसके लिए प्रेरित करने की स्थिति हो तो नियुक्ति प्राधिकारी संबंधित कार्मिक के खिलाफ फैसला ले सकता है। ऐसे में यदि कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) विनियमावली 2025 के नियम सात के तहत जांच करना संभव नहीं है तथा विद्युत आपूर्ति में व्यवधान की आशंका है तो वह संबंधित कार्मिकों को नियुक्ति प्राधिकारी बर्खास्त कर सकता है, सेवा समाप्त कर सकता है और पदावनति कर सकता है।

नियुक्ति प्राधिकारी के अलावा उससे वरिष्ठ अफसर भी कर सकेंगे कार्रवाई

संशोधन में यह भी प्रावधान है कि बर्खास्तगी व अन्य कार्रवाई नियुक्ति प्राधिकारी के अलावा उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भी की जा सकेगा। बशर्ते नियुक्ति प्राधिकारी प्रबंध निदेशक स्तर का होना चाहिए। इससे स्पष्ट है कि अब पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और विभिन्न विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक भी बिजली कर्मियों को बर्खास्तगी सहित अन्य कार्रवाई कर सकेंगे।

बिजलीकर्मियों ने नए नियमों को तानाशाही रवैया बताया

 सेवा विनियमावली में संशोधन पर बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आक्रोश जताया है। पदाधिकारी संजय सिंह चौहान, जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि पांचवे संशोधन के जरिए कार्पोरेशन प्रबंधन ने शांतिपूर्वक आंदोलन करने वाले बिजली कर्मयों के खिलाफ बर्खास्तगी, पद से हटाने का अधिकार हासिल कर लिया है। यह आदेश पूरी तरह से अलोकतांत्रिक, तानाशाही और मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने मुख्यमंत्री मामले में हस्तक्षेप की अपील की।
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