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मना करने पर बलपूर्वक भर्ती किए जाएंगे कोरोना के संदिग्ध मरीज, यूपी सरकार की ए़डवाइजरी
Mon, 16 Mar 2020 05:09 PM IST
Trainee Trainee
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 16 Mar 2020 05:09 PM IST
सार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में अगर कोरोना संदिग्ध कोई व्यक्ति जांच कराने या भर्ती होने से मना करेगा, तो उसका बलपूर्वक परीक्षण कराकर भर्ती कराया जाएगा। इसके साथ ही जबरन आइसोलेट भी कराया जाएगा। कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप पर नियंत्रण के लिए योगी सरकार ने रविवार को यूपी महामारी कोविड-19 विनियमावली, 2020 लागू कर दी है। इसके तहत कोरोना को लेकर भ्रामक जानकारी देने पर कार्रवाई की जाएगी।
यही नहीं, कोरोना को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन को कई तरह के प्रतिबंध लगाने का अधिकार भी दे दिया गया है। उसे संक्रमण पाए जाने वाले विशेष क्षेत्र को सील करने, प्रभावित क्षेत्र से जनसंख्या के प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध के साथ क्षेत्र में वाहनों का संचालन रोकने का अधिकार रहेगा।
जिला प्रशासन को ये महत्वपूर्ण अधिकार व निर्देश दिए
इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया के जरिये अफवाह या अप्रमाणिक सूचना फैलाना दंडनीय अपराध माना जाएगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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यही नहीं, कोरोना को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन को कई तरह के प्रतिबंध लगाने का अधिकार भी दे दिया गया है। उसे संक्रमण पाए जाने वाले विशेष क्षेत्र को सील करने, प्रभावित क्षेत्र से जनसंख्या के प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध के साथ क्षेत्र में वाहनों का संचालन रोकने का अधिकार रहेगा।
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जिला प्रशासन को ये महत्वपूर्ण अधिकार व निर्देश दिए
इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया के जरिये अफवाह या अप्रमाणिक सूचना फैलाना दंडनीय अपराध माना जाएगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- यदि किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई देते हैं तो अधिकृत अधिकारी संबंधित व्यक्ति को आइसोलेट कर सकेगा। मना करने पर बलपूर्वक ऐसा करने का अधिकार है।
- यदि कोई व्यक्ति जो कोविड-19 ग्रसित देशों की यात्रा करके भारत आया हो, बीमारी के लक्षण न होने पर भी उसे 14 दिनों तक घर में अकेले निगरानी में रखा जाएगा। उसे अपना मुंह व नाक को मास्क से ढंकना होगा।
- जिस व्यक्ति में रोग के लक्षण हों, उस व्यक्ति को अस्पताल में अलग रखते हुए परीक्षण किया जाएगा। सूचना मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को देना जरूरी होगा।
- सभी सरकारी व निजी चिकित्सालयों में संदिग्ध मामलों की स्क्रीनिंग के लिए फ्लू कॉर्नर या इंफ्लुएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) कॉर्नर होगा।
- सभी तरह की पद्धति के चिकित्सकों, चिकित्सालयों को कोविड-19 संक्रमित संदिग्ध की जानकारी जिला निगरानी इकाई को देनी होगी। संपर्क में आने वालों का रिकॉर्ड भी देना होगा।
- जिला प्रशासन रोक का फैलाव रोकने के लिए किसी भी सरकारी या निजी भवन को आइसोलेशन के लिए ले सकेगा। सभी सरकारी कर्मचारी जिला प्रशासन के निर्देश पर कार्य कर करेंगे।
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जिला मजिस्ट्रेट सीएमओ की संस्तुति पर संक्रमित व्यक्ति को प्रमाण पत्र जारी करेगा। इसे व्यक्ति के नियोक्ता को मानना होगा और उसे विशेष छुट्टी देनी होगी। इस विनियमावली का उल्लंघन करने वाले को आईपीसी के दंड भी दिया जा सकेगा।