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हिंदुओं का वोट जुटाने के लिए भाजपा का एक और पैंतरा, सरोकारों पर समर्पण का संकल्प फिर दिखाया

Fri, 14 Sep 2018 09:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 14 Sep 2018 09:45 AM IST
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UP government has decided to build statue of lord shree ram in ayodhya to get vote of hindus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
मिशन 2019 में फतह और ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ की रणनीति पर काम कर रही भगवा टोली हिंदुत्व के सरोकारों पर संदेश देने में कोई कसर छोड़ती नहीं दिख रही है। योगी सरकार का अयोध्या में सरयू तट पर 151 मीटर ऊंची भव्य भगवान श्रीराम की मूर्ति और शृंगवेरपुर में राम व केवट के मिलन की प्रतिमा लगवाने का फैसला इसी कोशिश का हिस्सा नजर आ रहा है।
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भाजपा और संघ परिवार का प्रयास इन मूर्तियों के सहारे सरोकारों पर समर्पण का संदेश बनाए रखने की दिख रही है। ये लोगों में यह भरोसा बनाए रखना चाहते हैं कि भले ही सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता अभी न खुल पा रहा हो, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी भाजपा का हिंदुत्व के सरोकारों पर समर्पण का संकल्प पहले जैसा ही है।
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सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश
दरअसल, गठबंधन के गणित के काट में जुटी भगवा टोली की रणनीति शुरू से ही चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने की रही है। यह तभी संभव है जब हिंदुओं का एकजुट वोट भाजपा को मिले। इसीलिए एक तरफ दलितों के सरोकारों और उनके लिए योजनाओं पर काम, दूसरी तरफ पिछड़ों पर अलग-अलग काम, कार्यक्रम के साथ उनसे संपर्क व संवाद के अभियान, गरीबों पर ध्यान के साथ भगवा टोली ने इन मूर्तियों के जरिये इसी गणित को अपने पक्ष में दुरुस्त करने की कोशिश की है।
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योगी सरकार शृंगवेरपुर में भगवान राम और निषादराज गुह के मिलन की मूर्ति के सहारे अगड़े और पिछड़ों की पौराणिक काल से एकजुटता तथा सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश करेगी। अयोध्या पर फोकस के पीछे भगवा टोली के सरोकारों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवेद्यनाथ का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के कारण इस स्थान से लगाव भी है।

महंत अवेद्यनाथ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के मुख्य चेहरे थे। वे भी जीवित रहते अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर देखना चाहते थे, पर यह संभव नहीं हुआ। उनके  शिष्य योगी बतौर मुख्यमंत्री इस भव्य मूर्ति के जरिये गुरु को भी श्रद्धांजलि देने की कोशिश कर रहे हैं।  

ऐसे शुरू हुए काम

UP government has decided to build statue of lord shree ram in ayodhya to get vote of hindus
पीएम मोदी और सीएम योगी - फोटो : SELF
केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के तत्काल बाद एजेंडे पर काम शुरू हो गए थे। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अयोध्या से जनकपुरी को जोड़ने वाले ‘राम-जानकी’ मार्ग और श्रीराम वनगमन मार्ग, मध्य प्रदेश के हिस्से वाले चित्रकूट से अयोध्या तक सड़क निर्माण जैसे कामों से सरोकारों पर केंद्र सरकार के समर्पण के संदेश की कोशिश शुरू की थी, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने इसी वर्ष जनकपुरी से अयोध्या तक बस शुरू कर परवान चढ़ाया।

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद भी इसी एजेंडे पर आगे बढ़ते हुए अयोध्या, काशी, मथुरा, मिर्जापुर, इलाहाबाद, चित्रकूट, नैमिषारण्य सहित हिंदुओं की आस्था से जुड़े अन्य स्थलों के विकास और उनके सांस्कृतिक पौराणिक महत्व पर फोकस करते हुए काम शुरू किए गए।

कोशिश इस तरह भी

अयोध्या में सरयू आरती, चित्रकूट में मंदाकिनी आरती, अयोध्या में दिवाली, काशी में देव दीपावली, बरसाना में होली के आयोजन मुख्यमंत्री योगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह आम हिंदू की आस्था का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह सब भगवा टोली की सोची-समझी रणनीति और योजना का हिस्सा था।

भगवा टोली भले ही कहे कि इन कामों का वोट की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। यह तो सीधे-सीधे आस्था और पर्यटन से जुड़ा मामला है। हजारों श्रद्धालुओं के इन स्थानों पर आने-जाने को ध्यान में रखते हुए इन पर फोकस किया गया है। पर, बात सिर्फ इतनी भर नहीं दिखती। भगवा टोली के रणनीतिकार चुनाव के दौरान निश्चित रूप से हिंदुत्व और विकास का एजेंडा सेट करते हुए इस सवाल के जरिये कांग्रेस, सपा, बसपा और अन्य विरोधी दलों को घेरेंगे कि उनकी सरकारों में इन स्थानों की उपेक्षा सिर्फ इसीलिए की गई क्योंकि ये हिंदुओं की आस्था से जुड़े हैं।
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