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गरीबों के बच्चों के लिए क्रेच योजना फ्लॉप
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 26 Sep 2014 03:04 PM IST
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गरीब कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए क्रेच बनाने की प्रदेश सरकार की योजना अफसरों की लापरवाही से फ्लॉप हो गई। जिलों से प्रस्ताव न आने के कारण एक भी क्रेच नहीं खुल सका।
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सरकार का मानना था कि कामकाजी महिलाओं को अपने छोटे बच्चों के कारण दिक्कतें आती हैं। कुछ महिलाएं कार्यस्थल पर बच्चों को साथ लेकर जाती हैं, लेकिन उनका खयाल नहीं रख पातीं।
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इस कारण बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। इसे देखते हुए दिसंबर 2013 में सूबे के तीन हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में क्रेच बनाने की जिम्मेदारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को दी गई।
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आंगनबाड़ी केंद्रों में क्रेच के लिए 150 से 175 वर्गफुट का एक अतिरिक्त कक्ष बनाया जाना था। प्रत्येक क्रेच में छह महीने से लेकर छह साल तक के 15 बच्चे रखे जाने थे।
यहां बच्चों को अनुपूरक पोषाहार, दोपहर का भोजन व शाम का नाश्ता देने के साथ उनकी देखभाल के लिए एक क्रेच वर्कर भी रखा जाना था।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय ने कई बार जिला कार्यक्रम अधिकारियों व प्रभारियों से क्रेच के लिए स्थान का चयन कर प्रस्ताव भेजने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। अब तो निदेशालय की समीक्षा बैठकों में भी इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होती।