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यूपी: ईडी के निशाने पर पूर्व सांसद रमाकांत यादव, भाई उमाकांत और बेटे रविकांत, मांगी गई हिस्ट्रीशीट

Sat, 06 Jul 2024 09:38 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 06 Jul 2024 09:38 PM IST
सार

ED target: रमाकांत और उमाकांत वर्तमान में जेल में हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक रमाकांत पर करीब 54, जबकि उमाकांत पर करीब 36 मुकदमे दर्ज रहे हैं। 

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UP: Former MP Ramakant Yadav, brother Umakant and son Ravikant on ED's target, history sheet sought
ED - फोटो : ANI

विस्तार

आजमगढ़ के पूर्व सांसद एवं वर्तमान में फूलपुर पवई सीट से सपा विधायक रमाकांत यादव और उनके पूर्व सांसद भाई उमाकांत यादव व उनका बेटा रविकांत यादव प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने पर आ चुके हैं। राजधानी स्थित ईडी के जोनल कार्यालय ने आजमगढ़ पुलिस से दोनों भाईयों और उमाकांत के बेटे रविकांत की भी हिस्ट्रीशीट मांगी है, जिसके बाद तीनों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाएगा।

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बता दें कि रमाकांत और उमाकांत वर्तमान में जेल में हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक रमाकांत पर करीब 54, जबकि उमाकांत पर करीब 36 मुकदमे दर्ज रहे हैं। मछलीशहर सीट से पूर्व सांसद उमाकांत यादव समेत सात लोगों को दो वर्ष पूर्व जीआरपी सिपाही हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। खुटहन से लगातार तीन बार विधायक और मछलीशहर से एक बार सांसद रहे उमाकांत यादव पर वर्ष 1977 में पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद आजमगढ़, लखनऊ और जौनपुर में 36 आपराधिक मामले दर्ज हुए। इसमें धोखाधड़ी, लूट, हत्या, लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे अन्य कई गंभीर मामले शामिल हैं। उमाकांत सपा और बसपा में रह चुके हैं।
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चार दशक पुराना आपराधिक इतिहास
बता दें रमाकांत और उमाकांत यादव का आपराधिक इतिहास करीब चार दशक पुराना है। चार बार सांसद और छह बार विधायक बन चुके रमाकांत पर हत्या, हत्या का प्रयास, गैंगस्टर जैसे तमाम संगीन अपराधों के मुकदमे दर्ज हैं। दोनों भाईयों पर सरकारी और निजी संपत्ति को जबरन हड़पने के भी तमाम आरोप हैं। दो वर्ष पहले आजमगढ़ में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत के मामले में भी रमाकांत को आरोपी बनाया गया था। वह भाजपा और सपा से जनप्रतिनिधि चुने जाते रहे हैं।
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पुलिस ने नहीं दी हिस्ट्रीशीट
ईडी ने करीब दस दिन पहले आजमगढ़ के एसपी को पत्र लिखकर दोनों भाइयों पर दर्ज मुकदमों और संपत्तियों की जानकारी मांगी थी। पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर ईडी के अधिकारी दोबारा पत्र भेजने जा रहे हैं, जिसके बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराकर जल्द रिकार्ड मुहैया कराने को कहा जाएगा।

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