UP: बलरामपुर में भी पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव ने किया घोटाला, दो पूर्व सीएमओ समेत 8 नामजद
स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूर्व विधायक सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच में बिना कार्य कराए भुगतान, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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बहराइच के पयागपुर से पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव पर बलरामपुर में स्वास्थ्य विभाग की एनआरएचएम योजना के कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं अंजाम देने के मामले में विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की है।
उनके साथ बलरामपुर के तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह, डाॅ. सत्यदेव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीन कुमार, सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव, अवर अभियंता राममनोरथ मौर्या, कनिष्ठ सहायक पूनम सिंह और आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव को भी नामजद किया गया है।
विजिलेंस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक मुकेश श्रीवास्तव और राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने तत्कालीन सीएमओ और विभागीय कर्मियों के साथ मिलीभगत करके बिना काम कराए अथवा आंशिक काम करके पूरा भुगतान ले लिया।
तत्कालीन अधिकारियों एवं कर्मियों ने अनुरक्षण कार्यों में अनियमितता की। शासन ने एनआरएचएम घोटाले से प्रभावित देवीपाटन मंडल के बलरामपुर जिले में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच वर्ष 2021 में विजिलेंस से कराने का आदेश दिया था।
विजिलेंस की जांच में भ्रष्टाचार अंजाम देने के पुख्ता सुबूत मिलने पर एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की गई थी। बीते दिनों शासन की अनुमति मिलने के बाद विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर द्वारा केस दर्ज किया गया है।
विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के दौरान बलरामपुर के अस्पतालों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं अंजाम दी गईं। वर्ष 2014 से 2019 तक फर्म ने आंशिक कार्य कराकर पूरा भुगतान लिया।
आरवीएसके और सपोर्टिंग सुपरविजन योजना में एक वाहन के बदले तीन वाहनों की धनराशि निकाली गई। टेंडर के बाद भी सीएमओ द्वारा एमओआईसी को छूट देकर अनियमितता की गई। चिकित्सा प्रतिपूर्ति वाउचरों के भुगतान के लिए 10 से 25 फीसदी तक घूस ली गई और बिना रजिस्टर बनाए पास कर दिया गया। इससे शासन को भारी क्षति हुई। बिना टेंडर के छपाई का कार्य कराकर भी अनियमितता की गई।
सीएमओ पर गंभीर आरोप
सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह पर एक वाहन चलाकर तीन वाहनों की धनराशि निकालने का आरोप है। उन पर बिना टेंडर के छपाई कार्य कराने का आरोप भी जांच में साबित हुआ। वहीं चिकित्सा प्रतिपूर्ति में अनियमितता डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. सत्यदेव, डॉ. प्रवीन कुमार ने अंजाम दी। वरिष्ठ सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव और कनिष्ठ सहायक पूनम सिंह भी इस मामले में आरोपी हैं।
डॉ. घनश्याम, डॉ. सत्यदेव, डॉ. प्रवीन कुमार और अवर अभियंता राम मनोहर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बता दें कि 10 दिन पहले भी विजिलेंस ने मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ श्रावस्ती में दवा और उपकरणों की खरीद में घोटाला करने पर एफआईआर दर्ज की थी। उनको एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।