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UP : बसपा के पूर्व नेशनल को-आर्डिनेटर जयप्रकाश सिंह की पार्टी में वापसी, इन राज्यों की मिली जिम्मेदारी

Sat, 08 Nov 2025 02:09 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 08 Nov 2025 02:09 PM IST
सार

यूपी में बसपा पार्टी से बड़ी खबर सामने आई है। अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने बसपा के पूर्व नेशनल को-आर्डिनेटर जयप्रकाश सिंह को नई जिम्मेदारी दे दी है। 

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UP: Former BSP national coordinator Jaiprakash Singh returns to the party, given responsibility for these stat
जयप्रकाश सिंह - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बसपा के पूर्व नेशनल को-आर्डिनेटर जयप्रकाश सिंह की फिर से पार्टी में वापसी हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कल दिल्ली में जयप्रकाश से मिलने के बाद फैसला लिया।   अब उनको पश्चिम बंगाल और उडीसा राज्य की जिम्मेदारी दी गई।

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दरअसल, मायावती ने अपने फैसलों को पलटते हुए पहले भतीजे आकाश आनंद और फिर समधी अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में वापसी कराई है। माना जा रहा है कि आकाश का बसपा में कद बढ़ने के बाद उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की वापसी का रास्ता साफ हुआ है। 
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इतिहास पर नजर डालें तो मायावती पहले भी तमाम नेताओं को इसी तरह माफ करती रही हैं। कुछ दिन पहले नगीना के सांसद गिरीश चंद्र को भी पार्टी में वापस लिया गया था। वहीं अफजाल अंसारी, इंद्रजीत सरोज समेत तमाम नेताओं का बसपा में आना-जाना लगा रहा।
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हाल ही में बसपा सुप्रीमो ने पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक और पूर्व एमएलसी एमएल तोमर को भी पार्टी में वापस लेने का फैसला लिया है, जो दर्शाता है कि निष्कासित नेताओं के लिए पार्टी के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए जाते हैं।

हालांकि बीते एक दशक पर नजर डालें तो पार्टी के तमाम कद्दावर नेताओं ने बसपा का साथ छोड़ने के बाद वापसी नहीं की। इनमें से तमाम दूसरे दलों में जाने के बाद बड़े पदों पर आसीन हैं तो कई राजनीति में अब सक्रिय नहीं हैं।

परिवारवाद से ही नुकसान

बता दें कि बीते कुछ साल में बसपा को परिवारवाद की वजह से खासा नुकसान सहना पड़ा है। अशोक सिद्धार्थ को गुटबाजी करने के आरोप में हटाया गया था। इससे मायावती के भाई आनंद कुमार को लेकर भी कई बार असमंजस की स्थिति रही, जिससे उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता रहा।



आकाश और अशोक को हटाने के दौरान मायावती ने कहा था कि आनंद ने मुझसे कहा है कि वह पार्टी हित में अपने बच्चों का रिश्ता गैर राजनीतिक परिवार से ही जोड़ेंगे। अशोक की तरह अब आगे पार्टी को कोई नुकसान न हो, इसका भरोसा आनंद ने दिलाया है। अशोक का दबाव बेटी पर है। बेटी का दबाव आकाश पर है। आकाश के दबाव में आने से पार्टी को नुकसान हो सकता है।

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