फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: First they were removed from their posts after being called corrupt and middlemen, then they were given as

यूपी: भ्रष्ट-दलाल कहकर पहले किया बाहर, फिर पॉजिटिव रिपोर्ट देकर दी तैनाती; 320 निजी कर्मियों का मामला

Mon, 22 Dec 2025 10:16 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Mon, 22 Dec 2025 10:16 PM IST
सार

यूपी में 320 निजी आरटीओ कर्मियों को पहले भ्रष्ट और दलाल बताकर हटा दिया गया, फिर पॉजिटिव रिपोर्ट देकर पुनः तैनात किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों से 3.50 करोड़ रुपये वसूले गए। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा, अधिकारियों की साजिश और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

विज्ञापन
UP: First they were removed from their posts after being called corrupt and middlemen, then they were given as
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजधानी सहित प्रदेशभर के आरटीओ व एआरटीओ कार्यालयों में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्य देख रहे 320 निजी कर्मियों को पहले भ्रष्टाचार और दलाली के आरोप लगाकर हटा दिया गया। बाद में उन्हीं कर्मचारियों की पॉजिटिव रिपोर्ट लगाकर दोबारा तैनाती दे दी गई। इससे अफसरों की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है।

विज्ञापन


ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा कामकाज निजी एजेंसी के पास है। पहले यह जिम्मेदारी स्मार्ट चिप कंपनी के पास थी, जिसके लखनऊ समेत प्रदेशभर में 320 कर्मचारी तैनात थे। ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ (प्रशासन) संजय तिवारी ने परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों को भ्रष्ट व दलाल बताया। हालांकि, एक दशक से अधिक समय तक साथ काम करने के बाद अचानक लगे आरोपों पर सवाल उठे। इसके बावजूद परिवहन आयुक्त ने न तो जांच कराई और न ही शिकायतों का ब्योरा मांगा। एकतरफा कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों को हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए।
विज्ञापन


आदेश में शर्त रखी गई कि यदि कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाता है तो संबंधित एआरटीओ की आख्या लगेगी और कंपनी को पुलिस सत्यापन कराना होगा। इससे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। नौकरी बचाने के लिए उन्होंने अफसरों व मंत्रियों से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद अफसरों ने मिलीभगत कर कर्मचारियों से मोटी रकम वसूली और फिर पॉजिटिव रिपोर्ट लगाकर उन्हें दूसरे जिलों में तैनात कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सवाल : भ्रष्ट से ईमानदार कैसे बने कर्मचारी

जिन कर्मचारियों को दलाल और भ्रष्ट बताया गया था, वे अचानक ईमानदार कैसे हो गए। उनकी कार्यप्रणाली को संतोषजनक बताते हुए प्रदेशभर में तैनाती कैसे दे दी गई, यह बड़ा सवाल बन गया है। सूत्रों का दावा है कि पूरा मामला साजिशन उठाया गया।

3.50 करोड़ की वसूली के बाद तैनाती!

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले में कर्मचारियों से मोटी रकम वसूली गई। इसमें मुख्यालय में उच्चस्तर पर तैनात एक महिला व पुरुष अधिकारी सहित कई आरटीओ व एआरटीओ की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों से 3.50 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हुई है।

कई अफसरों पर कार्रवाई संभव

परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय पहुंच चुकी है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी अफसरों से पूछताछ करेंगे कि बिना जांच आरोप कैसे लगाए गए और फिर संतोषजनक रिपोर्ट के आधार पर तैनाती कैसे दी गई। मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच शुरू होने पर मुख्यालय समेत कई आरटीओ अफसरों पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed