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यूपी: खुद पर चोरी के आरोप लगने से गुस्साए बिजली कर्मी, ऊर्जा मंत्री ने कहा था नाक के नीचे से होती है चोरी

Fri, 20 Dec 2024 08:40 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 20 Dec 2024 08:40 AM IST
सार

Electricity theft in UP: यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बुधवार को सदन में कहा था कि यूपी में कर्मचारियों के नाक के नीचे से बिजली चोरी होती है। इस बात से नाराज बिजली कर्मियों ने प्रदर्शन किया। 

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UP: Electricity workers angry after being accused of theft, Energy Minister had said that theft happens from r
यूपी में बिजली व्यवस्था - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बृहस्पतिवार को निजीकरण के विरोध में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किया। शाम को शहीदों के सपनों का भारत बनाओ - बिजली का निजीकरण हटाओ’ नारे के साथ सभाएं हुईं। लखनऊ में हुई सभा में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पर निशाना साधा। विधानसभा में उनके द्वारा कार्मिकों पर बिजली चोरी कराने संबंधी बयान देने की निंदा की गई। कार्मिकों ने कहा कि यदि ऊर्जा मंत्री खुद विफलता मान लिए हैं तो पद छोड़ें। निगमों के कार्मिकों पर आरोप लगाकर वह खुद को स्वच्छ साबित नहीं कर सकते हैं।

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उत्तर प्रदेश एवं चंडीगढ़ में बिजली के निजीकरण को लेकर बृहस्पतिवार को पूरे देश में बिजली कर्मियों ने विरोध जताया। लखनऊ के फील्ड हास्टल में हुई बैठक में निगमों के निजीकरण के विरोध में आक्रोश जताया गया। चेतावनी दी गई कि बिजली के निजीकरण की कोई भी एकतरफा कार्यवाही की गई तो उसी समय बिना और कोई नोटिस दिए देशभर के बिजली कर्मचारी आंदोलन शुरू करने हेतु बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और पावर कारपोरेशन प्रबन्धन की होगी। इस दौरान नाट्य प्रस्तुति के जरिए बिजली की आम आदमी की जीवन में उपयोगिता प्रस्तुत की गई। काकोरी क्रांति के शहीदों को श्रद्धाांजलि दी गई। मौके पर राजीव सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय,सुहैल आबिद, पीकेदीक्षित, राजेंद्र घिल्डियाल, चंद्र भूषण उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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ये कहा था ऊर्जा मंत्री ने
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि बिजली विभाग में कमियां हैं। धरातल पर स्थिति अच्छी नहीं है। तमाम प्रयासों के बावजूद बिजली कर्मचारियों के नाक के नीचे और उनकी जानकारी में चोरियां हो रही हैं। प्रदेश को अगर 24 घंटे बिजली देनी है, विकास के पथ पर चलना है तो व्यवस्था का निजीकरण जरूरी है। नोएडा और आगरा में इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

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आज बनेगी आंदोलन की नई रणनीति

 पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन से जुड़े अभियंताओं व अन्य कार्मिकों की शुक्रवार को बैठक होगी। इसमें निजीकरण के मुद्दे पर अगली रणनीति तैयार की जाएगी। एसोसिएशन की फील्ड हॉस्टल में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में अब तक चली गतिविधियों की समीक्षा की गई। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के विधानसभा में दिए गए बयान पर चिंता व्यक्त की गई। दलित और पिछड़े वर्ग के अभियंताओं को लक्ष्य बनाकर खराब स्थिति वाले क्षेत्र में तैनात किए जाने पर भी विरोध जताया गया। तय किया गया कि शुक्रवार को पूरे प्रदेश के एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारी व सदस्य ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ेंगे। इसमें आंदोलन की अगली रणनीति तैयार की जाएगी। बैठक में एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अनिल कुमार, आरपी केन, बिंदा प्रसाद, सुशील कुमार वर्मा, अजय कुमार, आदि मौजूद रहे।
निजीकरण के बहाने निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का प्रयास

पूर्वांचल और दक्षिणांचल को सस्ती बिजली खरीद का है समझौता

 प्रदेश में दो साल के लिए तय की गई पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए ) में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की खरीद दर सबसे सस्ती रखी गई है। ऐसे में इन दोनों निगमों को तोड़कर प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत जिन पांच कंपनियों को टेंडर मिलेगा, उन्हें सर्वाधिक फायदा होगा। नए मसौदे में लिखा गया है कि पहले से तय पीपीए दो साल तक नई कंपनियों पर लागू होगा। नियामक आयोग की ओर से वर्ष 2024 -25 के लिए सभी विद्युत वितरण निगमों के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) तय किया गया है।  इसी दर पर निगम बिजली खरीद करेंगे।

बल्क सप्लाई टैरिफ (बीएसटी) की दरों में पूर्वांचल को 5.21 रुपया प्रति यूनिट की दर से 17652 करोड़ की बिजली खरीदेगा। इसी तरह दक्षिणांचल 5.45 रुपया प्रति यूनिट की दर से 15910 करोड, पश्चिमांचल 5.65 प्रति यूनिट की दर से 24357 करोड की, मध्यांचल 5.40 रुपये प्रति यूनिट की दर से 16435 करोड की बिजली खरीदेगा। कानपुर की केस्को 6.51 रुपये प्रति यूनिट की दर से 2959 करोड की बिजली खरीदेगा। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का आरोप है कि कॉरपोरेशन प्रबंधन और एंपावर्ड कमेटी ने पीपीपी मॉडल के प्रस्ताव में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया है। मसौदे में साफ लिखा है कि पीपीपी मॉडल के तहत बनने वाली पांच बिजली कंपनियों के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए ) का अलॉटमेंट दो साल के लिए जस का तस रहेगा। ऐसे में ये पीपीपी मॉडल की पांचों कंपनियां जहां 9061 करोड़ का अनुदान पाएंगी वहीं खरीद दर भी उनकी सस्ती रहेगी। उन्होंने मांग की कि पीपीपी मॉडल का प्रस्ताव निरस्त किया जाए।







 

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