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यूपी: शिक्षण संस्थानों की बिजली की दरें व्यावसायिक श्रेणी से भी ज्यादा, ऊर्जा मंत्री ने सदन में स्वीकारा

Mon, 22 Dec 2025 09:45 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Mon, 22 Dec 2025 09:45 PM IST
सार

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सदन में स्वीकार किया कि यूपी में शिक्षण संस्थानों की बिजली दरें व्यावसायिक श्रेणी से भी अधिक हैं। इसे विसंगति बताते हुए उन्होंने सुधार का आश्वासन दिया। विपक्ष ने सवाल उठाए, वहीं सरकार ने इसे 2001 से चली आ रही व्यवस्था बताया।

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UP: Electricity rates for educational institutions are even higher than those for commercial establishments, t
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों की बिजली दरें व्यावसायिक श्रेणी से भी ज्यादा है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इसे विसंगति बताया। साथ ही कहा कि यह व्यवस्था वर्ष 2001 से लागू है, इसलिए इसके लिए भाजपा की वर्तमान सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि रेट तय करने का काम विद्युत नियामक आयोग का है।

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इसलिए आयोग के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रस्ताव रखा जाएगा। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने प्रश्न प्रहर में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा देना सामाजिक कार्य है तो व्यावसायिक बिजली बिल क्यों लिया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने विसंगति दूर करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि 2001 के बाद दो बार सपा की सरकार रही, तब उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।

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जब सभापति बोले-साढ़े आठ साल से तो आपकी सरकार

सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने पुरानी पेंशन का मामला उठाया। सपा के किरण पाल कश्यप ने शामली में एक सड़क के बनने पर धन्यवाद दिया। सड़क बनने में देरी पर पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री बृजेश सिंह ने कहा कि सपा सरकार में भी यह रोड नहीं बनी। इस पर सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने मंत्री से मुखातिब होते हुए कहा कि साढ़े आठ साल से तो आपकी सरकार है। 

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ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कोरोना के दौरान सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के रोके गए भत्ते जारी करने की मांग की। लाल बिहारी यादव ने शहीद पथ पर कुछेक और कट दिए जाने की आवश्यकता बताई, हालांकि, पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री बृजेश सिंह ने कहा कि ऐसा करने पर रोड बनाने का का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

बरेली की चीनी मिल ने दो साल से नहीं किया भुगतान

विधान परिषद में भाजपा के सदस्य महाराज सिंह ने कहा कि नवाबगंज (बरेली) की ओसवाल चीनी मिल ने विगत दो वर्षों से किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। करोड़ों रुपये की राशि का भुगतान न होने से किसानों ने धरना-प्रदर्शन भी किया। इसलिए इस स्थिति की ओर वह सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। भाजपा के ही सदस्य रामगोपाल उर्फ गोपाल अंजान ने बरेली-बीसलपुर रोड से धर्मपुरा-बिलासपुरा तक सड़क ठीक न होने का मामला उठाया।

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