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यूपी चुनाव : वोट प्रतिशत बढ़ा, फिर भी सत्ता दूर, सपा को गठन के बाद अब तक सर्वाधिक 32 फीसदी मिला वोट

Fri, 11 Mar 2022 06:30 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ।
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 11 Mar 2022 06:30 AM IST
सार

दिल्ली के बाद पंजाब में सरकार बनाने जा रही आम आदमी पार्टी (आप) यूपी में कोई खास करिश्मा नहीं कर पाई है। पार्टी ने वैसे तो यहां सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन 23 प्रत्याशियों का पर्चा खारिज हो गया था। ऐसे में पार्टी के कुल 380 प्रत्याशी ही मैदान में बचे थे। जीतना तो दूर इनमें से एक भी प्रत्याशी शीर्ष पांच में भी स्थान नहीं बना सका।

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UP elections: Vote percentage increased, yet power away, SP got maximum 32 percent votes so far after formation
Uttarakhand Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनाव नतीजों में सपा बहुमत से काफी दूर रही, लेकिन जनता का दिल जीतने में कामयाब रही। पहली बार 1993 में चुनाव लड़ने पर पार्टी को 17.94 फीसदी वोट मिले थे। तब बसपा के साथ मिलकर सपा सरकार बनाई थी। लेकिन इस बार पार्टी को अब तक का सर्वाधिक 32% वोट मिलने के बाद भी उसे सत्ता से दूर रहना पड़ रहा है।

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पार्टी गठन के बाद पहली बार 1993 में चुनावी मैदान में उतरी सपा को सिर्फ 17.94 फीसदी वोट मिले थे। इसके बाद 1996 में 13वीं विधानसभा के चुनाव में 21.80 फीसदी, 2002 में 25.37 फीसदी, 2007 में 25.43 प्रतिशत, 2012 में 29.13 फीसदी और 2017 के चुनाव में सपा को 21.82 फीसदी मत मिले थे। सपा ने इस बार महंगाई, आवारा पशु, पुरानी पेंशन व बेरोजगारी जैसे मुद्दों को हवा जरूर दी थी, लेकिन इसका उसे बहुत फायदा नहीं मिला। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किसान आंदोलन से मिली जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए इस बार रालोद को साथ लिया था। 
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कई बार चौधरी जयंत के कदम डगमगाते दिखे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। अखिलेश व जयंत ने सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर खुद की एका का प्रमाण भी दिया। इसके बाद भाजपा के 2014, 2017 और 2019 में रथ की रेस से आगे निकलने के लिए अखिलेश विजय रथ पर सवार हुए। शुरुआत में लगा कि अखिलेश-जयंत भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है, लेकिन पीएम मोदी और सीएम योगी ने उनके विजयरथ पर ब्रेक लगा दिया।
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80 बनाम 20 से ध्रुवीकरण को धार देने में सफल रही भाजपा
विधानसभा चुनाव में भाजपा पश्चिम से पूरब और अवध से बुंदेलखंड तक अलग-अलग चुनावी मुद्दों के जरिए 80 बनाम 20 के नारे के साथ ध्रुवीकरण को धार देने में सफल रही। भाजपा ने पश्चिम में पलायन, पूरब में माफिया पर वार के साथ अयोध्या और काशी से भी समीकरण साधे। भाजपा ने पहले और दूसरे चरण के चुनाव में कैराना से पलायन, मुजफ्फरनगर दंगे को तो तीसरे से पांचवें चरण में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, दीपोत्सव, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए विकास के साथ राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। छठे और सातवें चरण में माफिया मुख्तार और अतीक अहमद पर कार्रवाई के साथ पूर्वांचल से दिमागी बुखार की बीमारी का अंत और विकास को मुद्दा बनाया।




आप का नहीं दिखा करिश्मा
दिल्ली के बाद पंजाब में सरकार बनाने जा रही आम आदमी पार्टी (आप) यूपी में कोई खास करिश्मा नहीं कर पाई है। पार्टी ने वैसे तो यहां सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन 23 प्रत्याशियों का पर्चा खारिज हो गया था। ऐसे में पार्टी के कुल 380 प्रत्याशी ही मैदान में बचे थे। जीतना तो दूर इनमें से एक भी प्रत्याशी शीर्ष पांच में भी स्थान नहीं बना सका। यहीं नहीं, तमाम ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिनको एक हजार से भी कम वोट मिले हैं। जबकि दो दर्जन से अधिक प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो 300 से 500 वोट पाने में भी कामयाब नहीं हो सके हैं। गौरतलब है कि आप पिछले दो साल से उत्तर प्रदेश में पांव जमाने का प्रयास कर रही थी। इसके लिए भारी भरकम संगठन भी तैयार किया था।

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