यूपी चुनाव 2017: हरदोई की आठ सीटों पर कड़ी टक्कर
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हरदोई : नरेश के गढ़ पर सबकी नजर
छह बार विधायक और दो बार सांसद सपा महासचिव नरेश अग्रवाल पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। उनकी परंपरागत सदर सीट से बेटे और प्रदेश सरकार में मंत्री नितिन अग्रवाल उम्मीदवार हैं। नरेश के अजेय गढ़ को ढहाना आसान तो नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के भरोसे भाजपा के राजा बक्स सिंह मैदान मारने की कोशिश में हैं। वहीं, बसपा के धर्मवीर सिंह पन्ने भी बसपा का झंडा लहराने की कोशिश में लगे हैं। इस वीवीआईपी सीट पर पूरे सूबे निगाहें लगी हैं।
बिलग्राम-मल्लावां : परंपरागत लड़ाई के आसार
इस सीट पर 50 साल से कुर्मी और ब्राह्मण उम्मीदवारों में ही मुकाबला होता आया है। पिछले तीन चुनाव बसपा ने कुर्मी प्रत्याशियों के भरोसे ही जीते, लेकिन इस बार पूर्व विधायक धर्मद्य मिश्रा के बेटे अनुराग मिश्रा पर दांव लगाया है। धर्मद्य एक-एक बार कांग्रेस व सपा से विधायक रहे हैं। भाजपा कुर्मी बिरादरी के आशीष सिंह के भरोसे खाता खोलने की कोशिश कर रही है तो सपा सुभाष पाल को उतारकर पिछली हार का बदला लेने के लिए जोर लगाए है।
जातियों में उलझा कटियारी का विकास
पांच नदियों की कटियारी में सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव जातीय गणित में फंसा दिख रहा है। जाति के आगे विकास के मुद्दे गौड हो गए हैं। अब न कोई वोटर सूखी नहरों का जिक्र कर रहा है और न ही अर्जुनपुर पुल बनवाने की बात कह रहा है। सवर्ण और पिछड़ा वर्ग बाहुल्य इस क्षेत्र में भाजपा ने माधवेंद्र प्रताप सिंह, बसपा ने अनुपम दुबे और सपा ने पूर्व विधायक विश्राम सिंह के बेटे पद्मराग सिंह यादव को टिकट दिया है। फिलहाल मुकाबला त्रिकोणीय दिख रहा है।
शाहाबाद : ध्रुवीकरण में उड़े स्थानीय मुद्दे
मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर ध्रुवीकरण के आगे स्थानीय मुद्दे गौड़ हो गए हैं। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे इस क्षेत्र के वोटरों ने समय-समय पर सभी दलों को पूरा प्यार दिया। पिछले तीन चुनाव में भाजपा, बसपा और सपा ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में बसपा से आसिफ खां बब्बू और सपा से सिटिंग विधायक के बेटे सरताज खां मैदान में हैं। भाजपा ने ब्राह्मण महिला रजनी तिवारी पर दांव खेला है। सबसे बाद में प्रत्याशी घोषित की गई रजनी ने चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।
दो विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर
गोपामऊ : दो विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर
अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट पर भाजपा से सिटिंग विधायक श्याम प्रकाश और सपा से सांडी की सिटिंग विधायक राजेश्वरी मैदान में हैं। ये दोनों ही प्रत्याशी पासी बिरादरी से हैं, जबकि बसपा ने कुरील बिरादरी की मीना कुमारी को टिकट दिया है। इस क्षेत्र में भी मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। हालांकि आखिरी समय तक वे मौन हैं। दो विधायकों के बीच छिड़ी जंग को मीना त्रिकोणीय करने की कोशिश कर रही हैं।
सांडी : बसपा-भाजपा को टक्कर दे रही कांग्रेस
सुरक्षित सीट पर भाजपा, बसपा के उम्मीदवारों को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि इस सीट पर कोई चर्चित और बड़ा चेहरा मैदान में नहीं है, लेकिन पासियों के नेता रहे कुबेर के बेटे प्रभाष कुमार के मैदान में होने से लोगों की निगाहें लगी हैं। बसपा से पूर्व विधायक वीरेंद्र वर्मा और कांग्रेस से ओमेंद्र वर्मा स्वजातीय वोटरों को अपने पाले में करने में जुटे हैं।
सातवीं बार जीत की जुगत में रामपाल
बालामऊ : सातवीं बार जीत की जुगत में रामपाल
पूर्व मंत्री रामपाल वर्मा सातवीं बार विधायक बनने के लिए प्रयासरत हैं। रामपाल इस बार जीते तो नरेश अग्रवाल के रिकार्ड की बराबरी कर लेंगे। पिछली बार बसपा से लड़े रामपाल इस बार भाजपा से मैदान में हैं। उन्हें पूर्व विधायक और सपा प्रत्याशी सुशीला सरोज कड़ी टक्कर दे रही हैं। बसपा का चेहरा नीलू सत्यार्थी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए हैं। रिजर्व सीट पर जीत का दारोमदार सामान्य वोटरों पर है।
संडीला : पूर्व मंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर
इस सीट से पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान चुनाव लड़ रहे हैं। सपा उम्मीदवार मन्नान यहां से तीन बार बसपा से विधायक रह चुके हैं। पिछली बार सपा ने ही उन्हें मात दी थी। मुस्लिम बहुल इस सीट पर भी ध्रुवीकरण हावी होता दिखाई दे रहा है। दो बार एमएलसी रहे भाजपा के राजकुमार अग्रवाल मन्नान को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। बसपा ने यहां भी नए चेहरे पवन सिंह को टिकट दिया है। पवन ठाकुर और बसपा के काडर वोट के सहारे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाते दिख रहे हैं।