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यूपी: त्योहारी सीजन में फर्जी फर्मों पर कसेगा शिकंजा, एआई से होगी कारोबार की निगरानी

Wed, 14 Oct 2026 10:24 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 14 Oct 2026 10:24 AM IST
सार

अफसरों के मुताबिक, नई फर्मों के कारोबार, खरीद-बिक्री, कर भुगतान और आईटीसी दावों में असामान्य उतार-चढ़ाव पर नजर है। लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और मुरादाबाद में विशेष सतर्कता बरती जाएगी।

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UP: Crackdown on fake firms during festive season; business activities to be monitored via AI.
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

त्योहारी सीजन में जीएसटी चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिये सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाली फर्मों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य कर विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की टीमें सक्रिय हैं। इस बार छापेमारी के साथ डाटा एनालिटिक्स, जोखिम आकलन और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

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राज्य कर विभाग और केंद्रीय जीएसटी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, नई फर्मों के कारोबार, खरीद-बिक्री, कर भुगतान और आईटीसी दावों में असामान्य उतार-चढ़ाव पर नजर है। कम समय में करोड़ों की बिक्री दिखाना, खरीद के मुकाबले कई गुना आईटीसी लेना, बिना माल की वास्तविक आवाजाही के बिल जारी करना और कारोबार के अनुपात में कर जमा न करना संदेह के प्रमुख संकेत हैं। लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और मुरादाबाद में टीमें विशेष सतर्कता बरत रही हैं। अधिकारी चौबीसों घंटे निगरानी के मॉड्यूल के तहत काम कर रहे हैं।
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डिजिटल टूल्स से पकड़ी जाएंगी फर्जी फर्में
केंद्र सरकार के जीएसटी प्राइम एनालिटिकल टूल में जोखिम आधारित जांच, संदिग्ध आईटीसी दावों की पहचान, विभिन्न प्रणालियों के आंकड़ों का मिलान और आपूर्ति शृंखला में सर्कुलर ट्रेडिंग पकड़ने की सुविधाएं हैं। इसके तहत 80 से अधिक रिपोर्ट पर काम हो रहा है।
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फर्जी फर्मों की पहचान के लिए बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स (बीआईएफए) से पंजीकरण और कारोबार के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। ई-वे बिल एनालिटिक्स से माल की आवाजाही और रिकॉर्ड जांचे जाते हैं। नए कारोबारियों के संदिग्ध व्यवहार पर रिटर्न दाखिल होने से पहले भी जांच हो सकती है। एडवैट और जीएआईएन से मिलने वाली खुफिया जानकारी व जोखिम संकेतों के आधार पर भी पड़ताल की जा रही है।

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बायोमेट्रिक जांच से लेकर जियो-टैगिंग तक

डाटा विश्लेषण में जोखिम वाला आवेदक मिलने पर आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, फोटो और मूल दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा सकता है। घोषित बिक्री, कर देनदारी व आईटीसी दावों में अंतर और आपूर्तिकर्ता की ओर से घोषित न किए गए चालानों पर आईटीसी लेने के मामलों की भी जांच होगी। इससे वास्तविक खरीद-बिक्री के बिना टैक्स क्रेडिट लेने वाले नेटवर्क पकड़ने में मदद मिलेगी।

पंजीकरण के दौरान कारोबारी परिसर की जियो-टैगिंग की जा रही है। संदिग्ध पते, दस्तावेज और वास्तविक कारोबार का सत्यापन करने के लिए अधिकारी मौके पर निरीक्षण भी कर रहे हैं। त्योहारी मांग के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, सोना-चांदी, कपड़े, रेडीमेड गारमेंट, खाद्य तेल, ड्राई फ्रूट व पैकेज्ड सामान के कारोबार में बिलिंग और माल की वास्तविक आवाजाही पर विशेष नजर है।

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