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यूपी: रीयल एस्टेट में मनी लांड्रिंग रोकने के लिए एजेंटों पर नकेल, अब अनिवार्य होगा प्रशिक्षण और पुलिस सत्यापन

Sun, 11 Aug 2024 09:56 AM IST
रोहित मिश्र अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 11 Aug 2024 09:56 AM IST
सार

Real Estate Agent in UP: रियल स्टेट में बहुतायत में फैले एजेंटों पर अब सरकार नकेल कसने जा रही है। यूपी में अब हर एजेंट की एलआईयू व पुलिस रिपोर्ट ली जाएगी।

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UP: Crackdown on agents to stop money laundering in real estate, now training and police verification report w
यूपी में रियल एस्टेट एजेंट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रीयल एस्टेट में फ्राड, हवाला, मनी लांड्रिंग रोकने के लिए यूपी रेरा ने नकेल कसी है। अब हर एजेंट की एलआईयू व पुलिस रिपोर्ट ली जाएगी। आपराधिक व फ्राड छवि वाले एजेंटों को लाइसेंस नहीं मिलेगा। रिपोर्ट नकारात्मक मिलने पर लाइसेंस कैंसिंल कर दिया जाएगा। यूपी रेरा के मुताबिक रीयल इस्टेट में होने वाली अनियमितताओं में एजेंटों का बड़ा हाथ है।

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रीयल एस्टेट सेक्टर में हवाला, मनी लांड्रिंग और प्रापर्टी बेचने में होने वाले फर्जीवाड़े में एजेंटों की बड़ी भूमिका पाई गई है। यूपी रेरा (रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण) के मुताबिक प्रापर्टी की खरीद फरोख्त अधिकांश एजेंटों के जरिये होती हैं। प्रमोटर्स द्वारा सीधे बिक्री होने वाली प्रापर्टी की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है। यही वजह है कि ग्राहकों को तमाम शर्ते छिपाकर प्रापर्टी बेच दी जाती है। बाद में अधूरी या कमियां मिलने पर ग्राहक प्रोमोटर्स से शिकायत करता है, जिसे लेकर विवाद खड़े होते हैं और मामले अदालत चले जाते हैं।
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इस तरह होता है फर्जीवाड़ा
दूसरी तरफ रीयल एस्टेट में काले धन की इंट्री का रास्ता भी एजेंटों के जरिये बनाया जाता है। बड़े एजेंट तो प्रोमोटर्स के साथ फ्लैट बेचने का एग्रीमेंट कर लेते हैं और एकमुश्त भुगतान कर देते हैं। फिर महंगे दामों पर उन्हें बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। पैसे का नगद लेनदेन और हवाला का जमकर इस्तेमाल होता है। यूपी रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने अब एजेंटों पर लगाम कस दी है। पढ़े लिखे और साफ सुथरे बैकग्राउंड वाले लोगों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू की है। बीमा कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की तरह इन्हें रेगुलेट किया जाएगा। उनमें अनुशासन की कमी को प्रशिक्षण देकर दूर किया जाएगा।
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रीयल एस्टेट सेक्टर के प्रावधानों के बारे में पढ़ाया जाएगा। तीन दिन का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद परीक्षा ली जाएगी और प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। नए और वर्तमान दोनों ही एजेंटों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया है। अन्यथा पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ऐसे एजेण्ट जो एक वर्ष के अन्दर प्रशिक्षण नहीं लेंगे, उनकी एजेंसी निरस्त कर दी जाएगी। संजय भूसरेड्डी के मुताबिक ये शुरुआत रीयल इस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने, उपभोक्ताओें के हितों की सुरक्षा और उन्हें झूठे आश्वासनों से बचाने के लिए है।

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