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यूपी : पीएम पर 'अपमानजनक' टिप्पणी मामले में नेहा सिंह राठौर को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने अर्जी खारिज की

Fri, 05 Dec 2025 10:38 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Fri, 05 Dec 2025 10:38 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी वाले केस में नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोप संज्ञेय अपराध दर्शाते हैं और पुलिस जांच जरूरी है। इससे पहले उनकी एफआईआर रद्द करने की याचिका भी खारिज हो चुकी है और उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था।

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UP: Court rejects plea for Neha Singh Rathore's 'derogatory' remarks against PM
नेहा सिंह राठौर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री पर टिप्पणी मामले में शुक्रवार को राहत नहीं मिली। कोर्ट ने नेहा के खिलाफ लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज केस में उन्हें अग्रिम जमानत मंजूर करने के आग्रह वाली अर्जी खारिज कर दी।

इससे पहले बीते 19 सितंबर को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नेहा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार चुनाव और हिंदू-मुस्लिम राजनीति से जुड़े अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज इसी एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया था।

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न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिया। इसमें, नेहा ने केस में गिरफ्तारी से पहले जमानत देने की गुजारिश की थी। जमानत अर्जी का विरोध करते हुए शासकीय अधिवक्ता डा वी के सिंह का कहना था कि नेहा सिंह राठौर के खिलाफ इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज थाने में अप्रैल में एफआईआर दर्ज हुई थी।

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उन पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ, जब उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी बिहार आए ताकि पाकिस्तान को धमका सकें और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट बटोर सकें। उन्होंने यह भी लिखा था कि आतंकियों को ढूंढने और अपनी गलती मानने के बजाय बीजेपी देश को युद्ध की तरफ धकेलना चाहती है।

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि बीते 19 सितंबर को खंडपीठ ने नेहा सिंह राठौर की गिरफ्तारी पर रोक की याचिका खारिज करके उनको 26 सितंबर को जांच अधिकारी के सामने पेश होने और पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ लगे आरोप पहली नजर में संज्ञेय अपराध दर्शाते हैं, जिनकी पुलिस द्वारा जांच की जानी उचित है। अदालत ने कहा था कि उनके ट्वीट्स का समय बेहद अहम है, क्योंकि वे पहलगाम हमले के तुरंत बाद पोस्ट किए गए थे। ऐसे में इसी मामले में नेहा की अग्रिम जमानत मंजूर होने योग्य नहीं है। एकल पीठ ने कहा कि यह अग्रिम जमानत का मामला नहीं बनता है, लिहाजा अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की जाती है।

 

 

 

 

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