यूपी: सीएम योगी बोले- एआई अपराधियों को नहीं बचा पाएगा, प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उन्हें खोज निकालेगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एआई और डीपफेक के दौर में भी अपराधी कानून से बच नहीं पाएंगे। लखनऊ में टेक संगम 2026 के दौरान उन्होंने फॉरेंसिक जांच मजबूत करने के लिए 18 पुलिस रेंजों में प्रयोगशालाओं, नई तकनीकी परियोजनाओं और प्रशिक्षण पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी तकनीकों के दौर में अपराधी कितना भी तकनीक का आवरण ओढ़ लें, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उन्हें खोज निकालेगी। एआई मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक पर पूरी तरह निर्भर हो जाए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराध अनुसंधान प्रभावी होगा और न्याय मिलने में होने वाली देरी कम की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में काम करने वाले ‘LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी और ‘एआई इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन किया।
भू-माफिया से मुक्त कराई जमीन पर बना फॉरेंसिक संस्थान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए बताया कि करीब 100 एकड़ जमीन पर बने इस संस्थान की भूमि पर कभी लखनऊ के एक बड़े भू-माफिया का कब्जा था। वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई और भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरी एफआईआर दर्ज होते ही उसने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी।योगी ने कहा कि एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करना भी सपने जैसा लगता था। आज उसी जमीन पर बना संस्थान वैज्ञानिक जांच, आधुनिक अपराध अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दे रहा है।
‘सीआईडी’ की रील लाइफ अब रियल लाइफ
फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाते हुए मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘सीआईडी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है। अब फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक की मदद से वास्तविक जीवन में भी ऐसी जांच संभव हो रही है।मुख्यमंत्री ने एक माफिया के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उसने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव और डीएनए सैंपल नष्ट होने के कारण उसे वर्ष 2022 में, यानी 42 साल बाद सजा मिल सकी। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य कितने महत्वपूर्ण हैं और समय पर साक्ष्य जुटाना क्यों जरूरी है।
18 पुलिस रेंजों में विकसित हो रहीं फॉरेंसिक लैब
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी जरूरत को देखते हुए प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं। इनमें 12 लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, ताकि घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए जा सकें और जांच में तेजी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना मजबूत करने से न्यायालयों में मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी कम करने में मदद मिलेगी।‘लॉ विद लैब्स’ को आगे बढ़ाएगा LEXQ सेंटर
योगी ने यूपीएसआईएफएस की ‘लॉ विद लैब्स’ यानी कानून और प्रयोगशाला के समन्वय की अवधारणा को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और कानून को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। वैज्ञानिक जांच की विश्वसनीयता और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्यों का इस्तेमाल न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाता है।
इसी उद्देश्य से शुरू किया गया LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्वांटम तकनीक को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान से जोड़ेगा। सेंटर के माध्यम से क्वांटम फॉरेंसिक्स, विधिक अनुपालन, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
2017 के बाद प्रदेश में लगे 35 हजार नए उद्योग
औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में करीब 14 हजार उद्योग स्थापित हुए थे, जबकि 2017 के बाद 35 हजार नए उद्योग लगे हैं। उन्होंने इस बदलाव का संबंध बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल से जोड़ा।
योगी ने बताया कि प्रदेश के पास करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है और राज्य को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। लखनऊ स्थित एचसीएल सेंटर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में वहां करीब 100 कर्मचारी काम करते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 12,600 हो गई है। उन्होंने महिलाओं के रात की शिफ्ट में काम करने को सुरक्षा के माहौल में बदलाव और बढ़ती कार्यभागीदारी का उदाहरण बताया।
अयोध्या से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक विकास का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में वहां बिजली की उपलब्धता सीमित थी। अब अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा है। प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डे बने हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश के अनुकूल माहौल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।