UP: डीएल एजेंसियों के भ्रष्टाचार व लूट पर CM नाराज, बोले- ऐसी कंपनियों को परिवहन विभाग ने क्यों दे दिया काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्राइविंग लाइसेंस एजेंसियों पर भ्रष्टाचार और कर्मचारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतों पर नाराजगी जताई। उनके निर्देश के बाद परिवहन विभाग सक्रिय हुआ और पीड़ितों से शिकायतें लेकर जांच तथा एफआईआर की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
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ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियों के भ्रष्टाचार व लूट पर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाराज हो गए। उन्होंने कहाकि ऐसी कंपनियों को परिवहन विभाग में काम ही क्यों दिया गया। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री की नाराजी के बाद पिछले कई महीनों से चुप्पी साधे परिवहन विभाग के अधिकारी भी हरकत में आ गए। अधिकारियों ने एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर कराने के लिए पीड़ितों से शिकायतें ली हैं।
परिवहन विभाग में डीएल बनाने, प्रिंट व डिलीवर करने का काम सिल्वर टच, रोजमार्टा व फोकाम एजेंसियों के पास है। इनकी ओर से प्रदेशभर 320 कर्मचारियों को तैनात किया गया है। एजेंसियों के प्रतिनिधि भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कर्मचारियों से नियुक्ति के नाम पर वसूली की गई है।
सोमवार को डीएल एजेंसियों के भ्रष्टाचार व लूट के शिकार पीड़ित कर्मचारी जनता दर्शन में पहुंचे थे। जहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एजेंसियों की कारस्तानियों से रूबरू कराया। पीड़ित अखिलेश कुमार, अनुज कुमार आदि ने मुख्यमंत्री को बताया कि एजेंसियों ने भर्ती के नाम पर तीन से चार लाख रुपये वसूले।
इसके बाद जब एजेंसी प्रतिनिधियों ने उनसे सैलरी का पैसा एडवांस मांगा और उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। पीड़ितों ने बताया कि मुख्यमंत्री उनकी शिकायतें सुनकर एजेंसियों पर नाराज हो गए।
उन्होंने कहाकि ऐसी कंपनियों को परिवहन विभाग में काम ही क्यों दिया गया। साथ ही पीड़ितों को न्याय देने का आश्वासन भी दिया गया। सीएम की नाराजगी के बाद परिवहन विभाग के अफसर हरकत में आ गए। तत्काल पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें मुख्यालय बुलाया। उनसे एजेंसियों के खिलाफ शिकायतें ली।
पहले टरकाते रहे अफसर, अब पुचकार रहे
डीएल एजेंसियों की मनमानी, भ्रष्टाचार व लूट के मामले में पिछले करीब छह महीने से प्राइवेटकर्मी परेशान हैं। वे परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन सहित अन्य अफसरों से मिलने के लिए मुख्यालय भी गए, पर उन्हें टरका दिया गया।
अफसरों ने एजेंसियों के खिलाफ इंचभर कार्रवाई तो दूर, सुनवाई तक नहीं की, लेकिन सीएम के नाराज होते ही अफसर एक्टिव हो गए। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए पीड़ितों से बातचीत की। जो अफसर पहले उन्हें टरका रहे थे, वे सोमवार को कर्मियों को पुचकारते नजर आए।
अफसरों की शह पर डीएल एजेंसियों ने की लूट
डीएल एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने अफसरों की शह पर प्रदेशभर में कर्मचारियों से भर्ती के नाम पर तीन से चार लाख रुपये वसूले। कर्मचारियों के पैसों से ही कम्प्यूटर व यूपीएस लगवा गए। कर्मचारियों से उनकी सैलरी के पैसे भी एडवांस में वसूले गए, ऐसा करने से इनकार करने वाले 40 कर्मियों को निकाल दिया गया। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियों के इस लूटपाट में अफसरों को भी हिस्सा दिया गया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की शिकायत भी अफसरों ने कर दी दरकिनार
डीएल एजेंसियों की लूट के खिलाफ पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने जांच के आदेश भी दिए थे। 25 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखे गए। जांच रिपोर्ट कहां हैं, किसी को नहीं पता। पूरी जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
इतना ही नहीं परिवहन विभाग को 30 से अधिक शिकायतें दी गईं, लेकिन एजेंसी से सांठगांठ की वजह से अफसरों ने एक मामले में भी जांच नहीं करवाई। हद तो यह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी जांच के लिए पत्र लिखा, पर मामला सिफर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि डीएल एजेंसियों से निकाले गए प्राइवेट कर्मियों से शिकायतें ली गई हैं। संबंधित जिलों में एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई, जिसकी रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी।