फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   up cm akhilesh yadav interview

मेरी सरकार में सत्ता का और कोई केंद्र नहीं:अखिलेश

Fri, 12 Jun 2015 03:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Fri, 12 Jun 2015 03:52 PM IST
विज्ञापन
up cm akhilesh yadav interview

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई में सपा सरकार अगले चुनाव के लिए तैयार हो रही है। सरकार के अब तक के कार्यकाल में सूबे ने कई बदलाव देखे। वादों को परवान चढ़ते देखा तो टूटते भी देखा।

विज्ञापन


बदलाव की कसक और इंतजार को भी देखा। अब तक का कामकाज कैसा रहा,कहां कमी रही,ऐसे तमाम सवालों पर ‘अमर उजाला’ ने मुख्यमंत्री से बात की।

अखिलेश मानते हैं कि किसी भी सरकार की कामयाबी का पैमाना यह होना चाहिए कि जो मुख्यमंत्री शिलान्यास के पत्थर लगा रहा है,वही अपने कार्यकाल में उस प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी करे।
विज्ञापन


इस कसौटी पर मेरी सरकार खरी उतर रही है,हमने प्रोजेक्ट्स की शुरुआत का सिलसिला शुरू कर दिया है। ललितपुर पावर प्रोजेक्ट की 660 मेगावाट की पहली यूनिट शुरू हो गई है। लखनऊ मेट्रो और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े काम भी शिड्यूल के अनुरूप चल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूपी के सीएम अखिलेश यादव अभी से चुनावों के लेकर हमलावर हो रहे हैं। उन्होंने एक लंबे इंटरव्यू में इस बारे में बातें रखीं कि वह आने वाले चुनाव में किस तरह अपने को पेश करेंगे।

अखिलेश यादव को मालूम है कि उन्हें इस चुनाव में अपनी पारंपरिक प्रतिद्घंदी बसपा के साथ-साथ बीजेपी से भी जूझना होगा। क्या उनकी तैयारी मुक्कमल है। अखिलेश खुद ही इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं। पढ़िए उनका यह लंबा इंटरव्यू...

अपनी सरकार को कुछ इस तरह आंकते हैँ अखिलेश

up cm akhilesh yadav interview

सरकार के अब तक के कार्यकाल का आप कैसे आकलन करते हैं?

देखिए,हर काम में बेहतर की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। पिछली सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई थी। इसे पटरी पर लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। खुशी है कि मैं इसमें कामयाब रहा। जहां तक सरकार की उपलब्धियों के मूल्यांकन का सवाल है तो मैं इसे सौ फीसदी अंक दूंगा। सूबे में हमेशा से चुनावी सियासत का ट्रेंड रहा है।

विधानसभा चुनाव में अब दो साल से भी कम वक्त बचा है। क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?
पहली बात तो यह कि समाजवादी लोग कभी चुनाव में सियासी नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर प्राथमिकता तय नहीं करते। जनता को प्रोजेक्ट्स का फायदा मिले, इसलिए हमारी कोशिश है कि सारे काम समय पर पूरे हों।

लखनऊ मेट्रो,आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे,आईटी सिटी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम,कैंसर संस्थान, ट्रिपल आईटी,कुशीनगर हवाई अड्डा,काफी लंबी फेहरिस्त है,कामों की। सरकार ने जो काम शुरू कराए हैं उन्हें हर हाल में दो साल में पूरा किया जाएगा। यही हमारी प्राथमिकता होगी।

मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र की उपेक्षा क्यों?
देखिए,हमने लखनऊ में बन रहे आउटर रिंग रोड में हर जरूरी काम पूरे किए। मेरा मानना है कि केंद्र हमसे मदद ले रहा है,हमें भी मदद करेगा। मेट्रो में भी ऐसी ही उम्मीद है।

अखिलेश का दावा अगली बार भी हमें मिलेगी सत्ता

up cm akhilesh yadav interview

क्या सपा 2012 जैसी मजबूत स्थिति में है?
सपा विधानसभा चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का समय-समय पर मार्गदर्शन कर रहे हैं।जहां तक चुनावी संभावनाओं की बात है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पार्टी की नीतियों और राज्य सरकार की उपलब्धियों के आधार पर जनता फिर समाजवादी पार्टी को शासन की बागडोर सौंपेगी। मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया तो आपने ‘मेक इन यूपी’ का। स्वच्छता अभियान में भी ऐसा ही हुआ। साफ है कि केंद्र से बेहतर तालमेल नहीं हैं।

आखिर कहां दिक्कत आ रही है?
देखिए,आबादी के लिहाज से सबसे बड़े सूबे की अनदेखी कर ‘मेक इन इंडिया’ को सफल नहीं बनाया जा सकता। जहां तक स्वच्छता अभियान का सवाल है तो हमने सही मायने में इस अभियान को सार्थक बनाने की पहल की।हरियाली के बिना सब बेमतलब है। यही वजह है कि हमने सफाई के साथ हरियाली को भी जोड़ा। ‘क्लीन एंड ग्रीन यूपी’को साकार करने का काम तेजी से किया जा रहा है।

हर मंच पर आप यही कहते हैं कि सरकार काम बहुत कर रही है,पर प्रचार नहीं हो पा रहा। यह सरकार की नाकामी है या फिर संगठन की?

न तो यह सरकार की नाकामी है और न संगठन की। यह दौर मार्केटिंग का है। इसी के बूते कई लोग सत्ता पर काबिज हो गए। यही नहीं,इसके बाद भी लोगों को वे गुमराह कर रहे हैं।इसके उलट सपा सरकार ने जनहित और विकास के काम तो काफी किए लेकिन अपनी बात उस तरीके से जनता के बीच नहीं रखी,जिस तरीके से और लोग रखते हैं। यही वजह है कि हमने तय किया है कि सरकार की उपलब्धियां प्राथमिकता से जनता के बीच पहुंचाई जाएं।

अखिलेश मानते हैं यूपी की कानून-व्यवस्‍था को दुरुस्त

up cm akhilesh yadav interview

कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं?आपका क्या मानना है?

सपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर जब-तब आरोप लगाए गए। घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। बदायूं की घटना इसका बड़ा उदाहरण है। एक और उदाहरण कुंभ मेले का दूंगा। मेले के प्रबंध को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने सराहना की। करोड़ों-करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कोई दिक्कत नहीं हुई। मैं उन लोगों से सवाल पूछना चाहूंगा कि अगर कानून-व्यवस्था वाकई खराब है तो सूबे में नामी-गिरामी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां निवेश क्यों करतीं?

कहा जाता है कि पार्टी में कई सत्ता प्रतिष्ठान हो गए हैं। इसका असर सरकार के कामकाज पर पड़ रहा है। आपका क्या मानना है?

मैं इससे कतई सहमत नहीं हूं। संगठन और सरकार में ऐसी कोई बात नहीं है। पार्टी और सरकार दो संस्थाएं है, दोनों अपना काम अनुशासित और व्यवस्थित ढंग से कर रही हैं।

अक्सर सवाल उठते हैं कि आपकी सरकार में नौकरशाही बेलगाम हो गई है?

प्रशासनिक मशीनरी पर सरकार का पूरा नियंत्रण है। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। लापरवाही बरतने वालों पर बेहिचक सख्त कार्रवाई होती है। हां,यह जरूर है कि आतंक और घुटन का जो माहौल पिछली सरकार में था,उससे सभी कर्मचारियों व अफसरों को निजात मिल गई है।

नेपाल में आए भूकंप में सरकार ने मदद देने में जैसी तेजी दिखाई,वैसी तेजी बेमौसम बारिश और ओलों से बर्बाद किसानों की मदद में क्यों नहीं दिखी?

हमने दोनों जगह पूरी संवेदनशीलता दिखाई। भूकंप पीड़ितों की मदद में भी और किसानों की भी। पीड़ित किसानों को सबसे ज्यादा मुआवजा यूपी सरकार ही दे रही है। केंद्र ने दैवी आपदा पीड़ितों की मदद के लिए जितनी राशि तय कर रखी थी उसका दूना सपा सरकार ने दिया। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि लगातार अनुरोध के बावजूद केंद्र ने किसानों की मदद के लिए राज्य सरकार को कोई वित्तीय मदद नहीं की।





विधानपरिषद के विवाद पर ये बोले सीएम

up cm akhilesh yadav interview

विधानपरिषद में मनोनयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया? राज्यपाल को कैसे संतुष्ट करेंगे?

विधानपरिषद में मनोनीत होने वाले सदस्यों की सूची मानकों के अनुरूप है। पात्रता का पूरा खयाल रखा गया। निर्धारित श्रेणी के हिसाब से ही सदस्यता प्रस्तावित की गई। मुझे पूरा भरोसा है कि राज्यपाल महोदय तमाम तथ्यों का संज्ञान लेने के बाद सूची से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएंगे।

अगले चुनाव में असल चुनौती किससे है?

सूबे में अमन-चैन के माहौल को खराब करने वाले साम्प्रदायिक तत्वों को ही चुनौती माना जा सकता है। बहरहाल मैं इतना कहूंगा कि ऐसे तत्व अपने मंसूबे में कभी कामयाब नहीं होंगे। विधानसभा उपचुनाव में इनका क्या हश्र हुआ,आप देख ही चुके हैं।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed