यूपी उपचुनाव परिणाम: भविष्य की सियासत का देंगे संकेत तो प्रियंका गांधी की सक्रियता पर भी पता चलेगा रुझान
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तमाम सियासी उठापटक, बनते-बिगड़ते राजनीतिक रिश्ते और कोरोना जैसी महामारी के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा की सात सीटों के उपचुनाव के नतीजे आने में 24 घंटे से कुछ अधिक ही बचे हैं। वर्तमान परिस्थितियों तथा समीकरणों ने उपचुनाव के नतीजों को अहम तथा भविष्य की सियासी बाजी की दिशा बताने वाला बना दिया है।
इन नतीजों से जहां कोरोना संकट के दौरान सरकार व भाजपा संगठन की तरफ से किए गए कामों के दावों का सच सामने आएगा, वहीं विपक्ष की तरफ से सरकार के खिलाफ उठाए गए मुद्दों के ताप का भी पता चलेगा।
ये संकेत भी सामने आएंगे कि प्रदेश की भविष्य की सियासत और सियासी पार्टियों के रिश्तों तथा उनके संभावित समीकरणों की दिशा व दशा क्या है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस सियासी बिसात पर भाजपा के खिलाफ अपने मोहरे अलग-अलग ही चलने वाले हैं या कोई किसी से मिलकर खेल खेलेगा।
बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच हुए उपचुनाव
संयोग ही है कि ये उपचुनाव तमाम नए और बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच हुए हैं। इसके चलते इनके नतीजे प्रदेश की आगे की सियासत के सरोकारों से जुड़ गए हैं।
कोराना काल के दौरान विपक्षी दलों का सत्तापक्ष पर हमला तथा सरकार का प्रवासी मजदूरों को रोजगार से लेकर लोगों की चिकित्सा के इंतजाम तथा लोगों की सेवा के लिए किए गए कामों के दावे भी नतीजों की कसौटी पर हैं।
राहुल-प्रियंका की सक्रियता पर पता चलेगा जनता का रुझान
कुछ घटनाओं को लेकर विपक्ष की तरफ से ब्राह्मणों की उपेक्षा व उत्पीड़न को लेकर सरकार की घेराबंदी तथा हाथरस जैसी घटनाओं के सहारे विपक्ष, खास तौर से कांग्रेस व भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की पार्टी का सरकार को कठघरे में खड़ा करना तथा कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर उठाए गए सवालों का जनता में असर भी इन नतीजों से सामने आएगा।
पता चलेगा कि कांग्रेस के सड़कों पर संघर्ष तथा राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा की यूपी में सक्रियता का जनता में कुछ असर हुआ है या नहीं।
इसलिए भी नतीजे अहम
उपचुनाव के पहले प्रदेश में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम हुए। मसलन, राज्यसभा चुनाव में नौ सदस्य निर्वाचित कराने की ताकत होते हुए भी भाजपा का सिर्फ आठ उम्मीदवार उतारना। बसपा का आश्चर्यजनक तरीके से एक उम्मीदवार का पर्चा भरवाना तथा सपा का बसपा विधायकों में तोड़फोड़ कराना।
मायावती का सपा को हराने के लिए पहले भाजपा के समर्थन का एलान और फिर उस पर सफाई प्रदेश में नए सियासी रिश्तों तथा समीकरणों के संकेत दे गया। इसका असर उपचुनाव के मतदान में दिखा भी। इस लिहाज से भी उपचुनाव के नतीजे अहम होंगे।