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UP: इस रणनीति से सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट निकालेगी भाजपा...ये भ्रम मिटाकर गठबंधन को पटखनी देने का है प्लान
Mon, 21 Oct 2024 08:36 AM IST
शाहरुख खान
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 21 Oct 2024 08:36 AM IST
सार
यूपी विधानसभा चुनाव में इस रणनीति से भाजपा विपक्ष के पीडीए फॉर्मूले की काट निकालेगी। दिल्ली में हुई बैठक में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश संगठन की ओर से भेजे गए तीन-तीन नामों के पैनल में शामिल पिछड़े और दलित के नामों पर गंभीरता से विचार हुआ है।
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UP By Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे उपचुनाव को भाजपा ने सेमीफाइनल के तौर पर लड़ने की रणनीति बनाई है। इसके तहत भाजपा सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट के लिए 9 में से 8 सीटों पर दलित और पिछड़े चेहरे उतारकर उसको तगड़ी चुनौती देने की तैयारी की है।
पार्टी की रणनीति के तहत सिर्फ एक सीट पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को भी मौका मिल सकता है। दिल्ली में हुई बैठक में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश संगठन की ओर से भेजे गए तीन-तीन नामों के पैनल में शामिल पिछड़े और दलित के नामों पर गंभीरता से विचार हुआ है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में सीटें कम आने से जनता में फैले भ्रम को दूर करने के लिए भाजपा उपचुनाव के जरिये इंडिया गठबंधन को तगड़ी पटखनी देकर यह भ्रम मिटाना चाहती है।
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पार्टी नेतृत्व की पूरी कोशिश है कि उपचुनाव में शत-प्रतिशत परिणाम भाजपा के ही पक्ष में आए। इसलिए पार्टी खास रणनीति बना रही है। इसके तहत सामान्य सीटों पर भी वहां के पिछड़ों व दलितों का दिल जीतने के लिए इसी वर्ग के लोगों को मैदान में उतारा जा सकता है।
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पार्टी की रणनीति के तहत सिर्फ एक सीट पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को भी मौका मिल सकता है। दिल्ली में हुई बैठक में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश संगठन की ओर से भेजे गए तीन-तीन नामों के पैनल में शामिल पिछड़े और दलित के नामों पर गंभीरता से विचार हुआ है।
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दरअसल, लोकसभा चुनाव में सीटें कम आने से जनता में फैले भ्रम को दूर करने के लिए भाजपा उपचुनाव के जरिये इंडिया गठबंधन को तगड़ी पटखनी देकर यह भ्रम मिटाना चाहती है।
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पार्टी नेतृत्व की पूरी कोशिश है कि उपचुनाव में शत-प्रतिशत परिणाम भाजपा के ही पक्ष में आए। इसलिए पार्टी खास रणनीति बना रही है। इसके तहत सामान्य सीटों पर भी वहां के पिछड़ों व दलितों का दिल जीतने के लिए इसी वर्ग के लोगों को मैदान में उतारा जा सकता है।
सूत्रों की माने तो विधानसभा चुनाव वाले राज्यों के लिए प्रत्याशी तय करने के लिए हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में यूपी के उपचुनाव के लिए भी प्रत्याशियों के नाम की चर्चा हो चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि रणनीतिकारों ने भाजपा नेतृत्व को सपा के पीडीए फार्मूले की काट के लिए हर सीट के जातीय समीकरण को साधते हुए प्रत्याशी उतारने की सलाह दी है।
माना जा रहा है कि इस सलाह के आधार पर ही पार्टी से प्रत्याशी तय किए जाएंगे। ऐसे में पिछड़ों-दलितों को ही ज्यादा मौका मिलने की संभावना है।