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UP: तब सपा ने दिया था कांग्रेस का साथ... अब सहारा दे रहा हाथ; 1993 में भी सहयोगी पार्टी के लिए बनाई थी दूरी
Mon, 28 Oct 2024 09:39 AM IST
शाहरुख खान
अमृत चंद्र, अमर उजाला, लखनऊ
अमृत चंद्र, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 28 Oct 2024 09:39 AM IST
सार
समाजवादी पार्टी ने 1993 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस का साथ दिया था। तब सपा ने कांग्रेस का साथ दिया था। अब हाथ साइकिल को सहारा दे रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने गठबंधन के साथी समाजवादी पार्टी का साथ देने के लिए चुनावी रण से दूरी बनाने का फैसला किया है। ये पहली बार नहीं है, जब किसी दल ने सहयोगी पार्टी के लिए चुनाव से दूरी बनाई हो।
साल 1993 में देश के नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए थे। तब सपा ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस का साथ दिया था। हालांकि, यूपी में सपा ने कांग्रेस या किसी दूसरे दल से गठबंधन करने से इन्कार कर दिया था।
अमर उजाला में चार अक्तूबर 1993 को ''सपा द्वारा इंका से तालमेल का संकेत'' शीर्षक से प्रकाशित खबर के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के प्रधान महासचिव कपिल देव सिंह ने दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस पार्टी से चुनावी तालमेल करने का संकेत दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जिन राज्यों में कांग्रेस भाजपा को हराने की स्थिति में है, उन राज्यों में सपा तालमेल कर सकती है।
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यूपी में सपा-बसपा गठबंधन पर जताया था भरोसा
तब सपा ने उत्तर प्रदेश की स्थिति को अलग बताते हुए बसपा के साथ गठबंधन की बात की थी। कपिल देव सिंह ने कहा था कि हमारा गठबंधन उत्तर प्रदेश में भाजपा को हरा देगा। लिहाजा, राज्य में किसी भी दूसरे दल के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा।
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साल 1993 में देश के नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए थे। तब सपा ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस का साथ दिया था। हालांकि, यूपी में सपा ने कांग्रेस या किसी दूसरे दल से गठबंधन करने से इन्कार कर दिया था।
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अमर उजाला में चार अक्तूबर 1993 को ''सपा द्वारा इंका से तालमेल का संकेत'' शीर्षक से प्रकाशित खबर के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के प्रधान महासचिव कपिल देव सिंह ने दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस पार्टी से चुनावी तालमेल करने का संकेत दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जिन राज्यों में कांग्रेस भाजपा को हराने की स्थिति में है, उन राज्यों में सपा तालमेल कर सकती है।
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यूपी में सपा-बसपा गठबंधन पर जताया था भरोसा
तब सपा ने उत्तर प्रदेश की स्थिति को अलग बताते हुए बसपा के साथ गठबंधन की बात की थी। कपिल देव सिंह ने कहा था कि हमारा गठबंधन उत्तर प्रदेश में भाजपा को हरा देगा। लिहाजा, राज्य में किसी भी दूसरे दल के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा।
मुलायम सिंह को हराना चाहते हैं वीपी सिंह, चंद्रशेखर: सपा
सपा महासचिव कपिल देव सिंह ने तब आरोप लगाया था कि विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर उत्तर प्रदेश में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। ये नेता भाजपा के बजाय मुलायम सिंह यादव को हराना चाहते हैं।
सपा महासचिव कपिल देव सिंह ने तब आरोप लगाया था कि विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर उत्तर प्रदेश में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। ये नेता भाजपा के बजाय मुलायम सिंह यादव को हराना चाहते हैं।
कांग्रेस के चुनाव ना लड़ने के सियासी मायने
कमोबेश ऐसा ही हाल इस समय भी है। बस फर्क इतना है कि इस बार कांग्रेस ने यूपी में चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया है। हालांकि, इसमें सियासी पेंच भी है। पहले कांग्रेस उपचुनाव वाली 10 में पांच सीटें मांग रही थी। सपा ने खैर और गाजियाबाद सीट कांग्रेस को दे दी। बाद में फूलपुर सीट भी कांग्रेस को देने की बात हुई। कहा जा रहा है कि सीट बंटवारे से असंतुष्ट कांग्रेस ने गठबंधन टूटने का ठीकरा अपने सिर फूटने से बचाने के लिए उपचुनाव से किनारा किया है।
कमोबेश ऐसा ही हाल इस समय भी है। बस फर्क इतना है कि इस बार कांग्रेस ने यूपी में चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया है। हालांकि, इसमें सियासी पेंच भी है। पहले कांग्रेस उपचुनाव वाली 10 में पांच सीटें मांग रही थी। सपा ने खैर और गाजियाबाद सीट कांग्रेस को दे दी। बाद में फूलपुर सीट भी कांग्रेस को देने की बात हुई। कहा जा रहा है कि सीट बंटवारे से असंतुष्ट कांग्रेस ने गठबंधन टूटने का ठीकरा अपने सिर फूटने से बचाने के लिए उपचुनाव से किनारा किया है।