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यूपी भाजपा में 'यंगिस्तान' को काम, बुजुर्गों को आराम

Fri, 29 Apr 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 29 Apr 2016 02:04 AM IST
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UP BJP to work with youth for assembly election.
केशव प्रसाद मौर्य व सुनील बंसल - फोटो : amar ujala

भाजपा ने दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश में भी बुजुर्ग नेताओं को विश्राम देने और युवाओं को काम में लगाने का फैसला लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य की टीम का गठन इसी फार्मूले पर किया जाएगा। जहां तक बुजुर्ग नेताओं का सवाल है, तो उनका उपयोग चुनाव प्रबंधन और संगठनों के बीच समन्वय के लिए किया जाएगा।

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रणनीतिकारों ने तय किया है कि केशव की टीम का गठन न सिर्फ विधानसभा चुनाव, बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रख कर किया जाए।

इनका मानना है कि विधानसभा से लेकर अगले लोकसभा चुनाव तक में चूंकि युवा मतदाता ही निर्णायक भूमिका में रहने वाला है। इस लिहाज से टीम में युवाओं को रखना ही ठीक रहेगा।
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इससे एक ओर जहां युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ने का काम प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा, वहीं चुनावी दौड़भाग में भी आसानी रहेगी।

60 प्रतिशत होंगे नए चेहरे

UP BJP to work with youth for assembly election.
भाजपा बैठक में ओम माथुर, केशव प्रसाद मौर्य व सुनील बंसल - फोटो : amar ujala

अगर सब कुछ रणनीति के हिसाब से चला, तो केशव की टीम में 60 प्रतिशत नए चेहरे होंगे। इससे भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कई लोगों को मुख्य संगठन में जगह मिलने की उम्मीद है।

रणनीतिकारों की कोशिश केशव की टीम के साथ ही संगठन के वैचारिक अधिष्ठान को भी मजबूत बनाने की है। इसलिए उन्होंने तय किया है कि भाजयुमो सहित विद्यार्थी परिषद व संघ परिवार के अन्य संगठनों में सक्रिय युवाओं को भी चुनावी टीम में शामिल किया जाए।

पिछड़ों के साथ अगड़ों का संतुलन
प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य चूंकि खुद पिछड़े वर्ग से आते हैं। इसलिए रणनीतिकारों ने नई टीम में पिछड़ों के साथ अगड़ों का संतुलन बनाने का निश्चय किया है। इससे लोगों में भाजपा में अगड़ों की अनदेखी का संदेश नहीं जाने पाएगा।

नई टीम का फोकस केवल चुनाव लड़ने पर न होकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर भी रहेगा। इसलिए नई टीम में ज्यादातर वही लोग रखे जाएंगे, जो चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगे।

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