50 भाजपाई सांसदों का ड्रामा खत्म नहीं झुकी सपा सरकार
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हाईवोल्टेज सस्पेंस और ड्रामे के बीच भाजपा सांसदों ने राज्यपाल की प्रमुख सचिव को ज्ञापन देकर 24 घंटे से चल रहा धरना समाप्त कर दिया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा है कि इस माह के अंत या अगले माह के प्रारंभ में प्रदेश के भाजपा सांसद, विधायक और प्रमुख नेता राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें प्रदेश सरकार के खिलाफ चार्जशीट सौंपेंगे।
भाजपा सांसदों ने शनिवार को विधान भवन के सामने 24 घंटे का धरना शुरू किया था। वे चाहते थे कि मुख्य सचिव उनका ज्ञापन लेने आएं अन्यथा वे मुख्यमंत्री निवास के लिए कूच करेंगे। सांसदों की संभावित रणनीति को देखते हुए शनिवार रात एक बजे प्रशासनिक अधिकारियों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व अन्य नेताओं से वार्ता की।
अधिकारियों ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देने का आग्रह किया था लेकिन भाजपा नेताओं ने इसे ठुकरा दिया। उनका कहना था कि वे मुख्य सचिव से कम किसी को ज्ञापन नहीं देंगे। उन्होंने अधिकारियों से रविवार सुबह तक जवाब देने को कहा था।
रविवार को भाजपा सांसदों की कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच के ऐलान को देखते हुए सुबह से ही कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे। कई जगह बैरिकेडिंग की गई थी, धरनास्थल पर भी बड़ी संख्या में पुलिस व पीएसी तैनात थी।
15 मिनट का अल्टीमेटम
धरनास्थल पर डॉ. वाजपेयी ने 10.45 बजे प्रशासन को 15 मिनट का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि शनिवार रात वार्ता करने वाले अधिकारी जवाब दें वरना भाजपा सांसद खुद निर्णय करेंगे। उनकी इस घोषणा पर वहां मौजूद मजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारियों को लगा कि टकराव की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने उच्चाधिकारियों को इससे अवगत कराया। लेकिन अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। ठीक 11 बजे भाजपा सांसदों और कार्यकर्ताओं ने विधानभवन के सामने से हजरतगंज चौराहे की ओर पैदल मार्च शुरू किया।
राजभवन जाने से पुलिस को मिली राहत
भाजपा सांसद हजरतगंज चौराहे से राजभवन व कालिदास मार्ग की तरफ बढ़े। पुलिस व प्रशासन को लग रहा था कि राज्यपाल शहर से बाहर हैं, इसलिए भाजपाई शायद मुख्यमंत्री निवास ही जाएंगे। पर, सांसद राजभवन के सामने पहुंचते ही रुक गए।
उनके आगे चल रही पुलिस कालिदास मार्ग की ओर बढ़ रही थी। पुलिसकर्मी लौटे तो सांसद राजभवन में प्रवेश कर रहे थे। इससे पुलिस ने राहत महसूस की।
इन मुद्दों पर राज्यपाल से की दखल की मांग
राज्यपाल की प्रमुख सचिव को ज्ञापन देने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि उन्होंने बिगड़ती कानून व्यवस्था, बदहाल बिजली आपूर्ति, विद्युत दरों में वृद्धि, किसानों के साथ भेदभाव और सांसदों व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के मुद्दे पर राज्यपाल से दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा, पार्टी नेताओं की एक कमेटी प्रदेश सरकार के खिलाफ चार्जशीट तैयार करके राष्ट्रपति को देगी।
केंद्रीय योजनाओं की जांच की करेंगे सिफारिश
धरनास्थल पर कई सांसदों ने प्रदेश सरकार द्वारा केंद्रीय योजनाओं के धन का दुरुपयोग करने की जांच भारत सरकार से कराने की मांग की।
उन्होंने कहा, केंद्रीय योजनाओं में इतनी अनियमितता है कि जांच होते ही प्रदेश सरकार को जाना पड़ेगा। डॉ. वाजपेयी ने कहा, यदि सांसद अनुमति देंगे तो वह इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे। सभी सांसदों ने हाथ उठाकर केंद्रीय योजनाओं की जांच की सिफारिश संबंधी पत्र केंद्र सरकार को भेजने का समर्थन किया।
टकराव की थी आशंका, नरम पड़े सांसद
धरनास्थल पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, सांसदों व अन्य नेताओं के तेवर काफी तल्ख दिख रहे थे। लग रहा था कि मुख्यमंत्री निवास पर जाने के मुद्दे पर टकराव हो सकता है लेकिन सांसदों ने नरमी दिखाई।
राज्यपाल की गैरहाजिरी में उन्होंने प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर को ज्ञापन देकर अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। डॉ. वाजपेयी ने दावा किया कि उनके पैंतरे के सामने प्रशासन और खुफिया तंत्र फेल हो गए। वे सांसदों के कालिदास मार्ग पहुंचने का इंतजार कर रहे थे और हम राजभवन चले गए। हमारी रणनीति की भनक पुलिस व इंटेलीजेंस को नहीं लगी।
सपा सरकार संवेदनहीन, मद में चूर
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा, सपा नेता मद में चूर हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि अहंकार तो रावण और कंस का भी नहीं रहा। विधान परिषद में भाजपा के नेता हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि प्रदेश सरकार संवेदनहीन और गुंडाराज की पर्याय बन गई है।
उनके 45 साल के राजनीतिक जीवन में पहली बार इतनी बड़ी तादाद में सांसद विधानभवन के सामने धरने पर बैठे। लोकतंत्र में एक गरीब अकेला भी धरना दे तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए लेकिन 50 सांसदों के 24 घंटे के धरने के दौरान सरकार के किसी जिम्मेदार मंत्री या वरिष्ठ अफसर ने आकर उनसे बात नहीं की।
डूबते सूरज को सलाम कर रहे अफसर
डॉ. वाजपेयी ने अफसरशाही को भी निशाने पर लिया। कहा, अधिकारी जनता के नौकर कम सपा के चाकर ज्यादा हैं। वे अपने ‘आकाओं’ को खुश करने में लगे हैं। उनकी मति पर पत्थर पड़ा है। उगते सूरज का सम्मान करने की परंपरा है लेकिन वे सपा के डूबते सूरज को सलाम कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी धरने पर बैठे
रविवार को केंद्रीय वस्त्र राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार करीब 46 सांसदों व भाजपा नेताओं के साथ धरने पर बैठे। वह धरना समाप्त होने तक वहीं रहे। शनिवार को केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र और रामशंकर कठेरिया भी धरनास्थल पर पहुंचे थे लेकिन वहां बैठने के बजाय नेताओं से मिलकर चले गए थे।
दूसरे दिन भी नदारद रहे कई दिग्गज
दूसरे दिन भी कई दिग्गजों समेत लगभग एक दर्जन सांसद धरनास्थल पर नहीं पहुंचे। इनमें मुरली मनोहर जोशी, महंत आदित्यनाथ, वरुण गांधी, साक्षी महाराज के अलावा हुकुम सिंह, सर्वेश सिंह, नेपाल सिंह, कंवर सिंह तंवर, राजेश पांडेय, रामचरित निषाद आदि मुख्य हैं।