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UP BJP: घर के बागी ही बाहर रोकेंगे बगावत

Mon, 17 Nov 2014 01:33 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 17 Nov 2014 01:33 AM IST
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UP BJP leaders to go J and K for election.

जम्मू-कश्मीर के चुनाव में टिकटों को लेकर भाजपा में उठे विरोध व विद्रोह की आवाजों को शांत करने की जिम्मेदारी यूपी वालों को सौंपी गई है। इस मकसद में यह कितना कामयाब हो पाएंगे, यह तो आने वाला वक्त बताएगा।

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पर, इस फैसले को लेकर यह सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं कि जो राज्य अपने घर में बगावत नहीं रोक पाया। वहां के लोग दूसरे राज्य जम्मू-कश्मीर चुनाव में विरोध व विद्रोह के स्वरों को शांत करने की जिम्मेदारी सौंपने का मकसद क्या है और यह लोग कितना सफल होंगे।
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बात सही भी है। जो प्रदेश में उद्धार के लिए दूसरों का सहारा लेता रहा हो। वहां के लोग दूसरे को उद्धार का उपदेश दे भी कैसे सकते हैं।

सिर्फ लोकसभा चुनाव पर ही नजर डालें तो पता चलता है कि अमित शाह जैसी कड़क छवि वाला नेता भी उत्तर प्रदेश में बतौर प्रभारी तैनात होने के बावजूद लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर उठे बागी स्वरों को पूरी तरह शांत नहीं कर पाया।
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बगावत थामने वालों में बागी भी

UP BJP leaders to go J and K for election.

मजेदार बात तो यह भी है कि बगावत थामने के लिए भेजे गए लोगों में रामाशीष राय भी शामिल हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय खुद दो बार टिकट कटने ने मिलने पर बागी हो चुके हैं। उनके अलावा जिन लोगों को लगाया गया है उनमें पूर्व विधायक बुलंदशहर के सतीश शर्मा, आगरा के चौधरी उदयभान सिंह के अलावा पार्टी प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन सिंह, एटा के विपिन शर्मा, आगरा के प्रमोद गुप्ता शामिल हैं।

इस पूरे काम की कमान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष महेन्द्र पांडेय को सौंपी गई है। इनके साथ बिहार के भी कुछ लोग हैं। फिलहाल इन्हें ऊधमपुर, रियासी, रामनगर सहित पांच सीटों पर लगाया गया है। फिर इन्हें चरणवार चुनाव के अनुसार दूसरी सीटों पर भेजा जाएगा।

यूपी तो अब भी मुक्त नहीं
जहां तक यूपी की बात है तो केंद्र में सत्ता मिलने के बावजूद यहां की भाजपा अब भी पूरी तरह बागियों व बगावत से मुक्त नहीं हुई है। पांच दिन पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने जिस तरह लगभग डेढ़ दर्जन जिला अध्यक्षों को हटाकर उन्हें दूसरी जिम्मेदारी सौंपी।

उस पर भी विद्रोह व बगावत के स्वर मुखर होने से यूपी के नेता रोक नहीं पाए। नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी ओम माथुर तक के सामने पार्टी के इस फैसले के खिलाफ नारे लगे।

नेता हार गए पर बगावत नहीं थमी

UP BJP leaders to go J and K for election.

भाजपा यहां पिछले लगभग 12 वर्षों से बगावत की समस्या से ग्रस्त है। जिससे उबरने में यूपी वालों के फेल होने के बाद कभी अरुण जेटली की मदद ली गई तो कभी संजय जोशी की। कभी उमा भारती तैनात की गई।

पर, न बागी माने और न बगावत थमी। ऐसे राज्य से भेजे गए भाजपाई दूसरे राज्यों में बगावत को कैसे शांत करेंगे।

वैसे कुछ लोग चुटकी भी ले रहे हैं कि बगावत को नजदीक से देखने के अनुभव के कारण ही इन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।

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