UP: सात दिन में हो जाएगा भाजपाइयों की किस्मत का फैसला
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सूबे के भाजपा नेताओं के भविष्य के लिए नवंबर का पहला सप्ताह बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी ओम माथुर 3 से 5 नवंबर तक यहां बैठक करेंगे। इसमें संगठन के कामकाज और चुनाव के अलावा पंचायत चुनाव के निष्कर्षों पर विचार-विमर्श होना है।
इसके लिए सभी जिलों से पंचायत चुनाव के नतीजों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। स्वाभाविक रूप से इस मंथन से निकलने वाला निष्कर्ष नेताओं के मूल्यांकन का किसी न किसी रूप में आधार जरूर बनेगा।
पंचायत चुनाव के नतीजों की घोषणा 1 नवंबर से शुरू हो जाएगी। उम्मीद है, 2 नवंबर तक सारे परिणाम आ जाएंगे। इसलिए बैठक में माथुर के सामने चुनाव की पूरी तस्वीर होगी। जब जिलों के नतीजों पर चर्चा होगी तो चुनाव में नेताओं की भूमिका से लेकर मतदाताओं के रुझान तक पर बात जरूर होगी।
पार्टी नेताओं की सक्रियता, लोगों में पकड़ और उनकी क्षमता के बारे में तथ्य भी सामने आएंगे। ये तथ्य किसी न किसी रूप में इन नेताओं को भविष्य में भूमिका सौंपने के लिए शीर्ष नेतृत्व के लिए फीडबैक का काम करेंगे।
माथुर पहले ही संकेत कर चुके हैं कि प्रदेश में पंचायत चुनाव लड़ने के पीछे उनका मकसद विधानसभा चुनाव 2017 की तैयारियों को एक तरह से फाइनल टच देना है।
विधानसभा चुनाव के लिए फीडबैक
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि प्रदेश में पहली बार पंचायत चुनाव लड़ रही भाजपा के लिए नतीजों से ज्यादा संतोष की बात माहौल में आई तब्दीली है। लगभग तीन हजार सीटों के लिए 25 हजार सेे ज्यादा लोगों के टिकट मांगने से साफ हो गया था कि प्रदेश में भाजपा का माहौल है।
हमें संतोष है कि भाजपा का झंडा व बैनर उन गांवों में भी पहुंच गया जिन्हें भाजपा के लिहाज से बहुत दुष्कर माना जाता था। जाहिर है, सामने आए तथ्यों को आधार बनाकर पार्टी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगी। जहां कहीं पहले के प्रयोग और फैसले अपेक्षित नतीजे देने में असफल रहे हैं वहां नए सिरे से रणनीति बनाई जाएगी।
पार्टी बहुत पहले से ही हर बूथ पर संगठन के पहुंचने का दावा करती आ रही है। पर, बैठक में अगर किसी बूथ पर पार्टी को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले तो वहां बूथ कमेटी का नए सिरे से गठन किया जाएगा।
अगर कहीं किसी पदाधिकारी या प्रभारी की भूमिका पार्टी के लिए बहुत सार्थक नतीजे नहीं दे पाई है तो उसके बारे में नए सिरे से विचार किया जा सकता है। उसके अगले दावों के बारे में निर्णय भी पंचायत चुनाव में उसकी भूमिका के आधार पर ही होगा।
नतीजों से तय होगी संगठन में नेताओं की भूमिका
रणनीतिकारों ने पहले ही सोची समझी रणनीति के तहत पंचायत चुनाव के लिए नेताओं के कामकाज की कसौटी बना दी थी।
इसीलिए सभी प्रमुख नेताओं से लेकर सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों को इस चुनाव में न सिर्फ कोई न कोई जिम्मेदारी सौंपी गई बल्कि प्रत्याशी तय करने में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई थी ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों से मुकर न सकें।
शीर्ष नेतृत्व इन सब बिंदुओं पर गौर करेगा। पार्टी नेताओं की मानें तो नवंबर के पहले सप्ताह में आने वाले नतीजों के आधार पर ही संगठन में नेताओं की भूमिका तय होगी।
भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक भी स्वीकार करते हैं कि तीन दिन की बैठक में पंचायत चुनाव के परिणाम विचार-विमर्श का प्रमुख हिस्सा होंगे।