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यूपी विधानसभा: सवाल पूछने को धंधा बताने पर हंगामा, तीन मंत्रियों की जुबान फिसली; सपा का वॉकआउट

Thu, 19 Feb 2026 08:51 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 19 Feb 2026 08:51 PM IST
सार

UP Assembly: यूपी विधानसभा बृहस्पतिवार को हंगामेदार रही। मंत्री एक टिप्पणी ऐसी रही कि बाद में उसे विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही से हटाने का फैसला किया। 

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UP Assembly: Uproar over calling questioning a business, three ministers slip up; SP walks out
यूपी विधानसभा कार्यवाही। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 विधानसभा में बृहस्पतिवार को तीन मंत्रियों की जुबान बेकाबू हो गई। विधानसभा अध्यक्ष को उन्हें आगाह करते हुए सख्त हिदायत देनी पड़ी। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी से सपा सदस्य डॉ. वीरेंद्र यादव ने प्रदेश में उद्योगों के विकास की योजनाओं के बारे में सवाल किया। इस पर नंदी ने यह बोलकर पूरे सदन को सकते मेंं डाल दिया कि कुछ सदस्यों ने सवाल लगाने का धंधा बना लिया है। इसके जरिए वह उद्योगपतियों से वसूली करते हैं।

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इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें टोकते हुए कहा कि ऐसा जवाब देना अनुचित है। सदस्य ने किसी भी उद्योग का नाम लिया है। आप किसी को ऐसा नहीं कह सकते हैं। किसी पर ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणी भी नहीं की जा सकती है। वहीं, इससे पहले मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने मंडी परिषद की सड़कों के निर्माण से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि मैं तो हर विधायक को फोन करके प्रस्ताव मांगता हूं। विधानसभा अध्यक्ष को भी मैंने फोन किया था। उनके बताए सारे काम कराए। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि आपको मंत्री इसीलिए बनाया गया है। वहीं, छात्रवृत्ति के सवाल पर जवाब दे रहे मंत्री नरेंद्र कश्यप को भी अध्यक्ष ने लगातार बोलने पर टोका और उनका माइक बंद करने की चेतावनी दी।
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सदन को हाईजैक कर रहीं डॉ. रागिनी
सपा सदस्य डॉ. रागिनी सोनकर ने मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से पूछे सवाल के साथ बनारस में विभाग में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। अध्यक्ष ने इसे प्रमाणित करने को कहा तो उन्होंने जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रख दी। वहीं मंत्री दिनेश सिंह ने अपने जवाब में कहा कि ज्यादा बोलने का मतलब यह नहीं कि सदन को गुमराह कर दिया जाए। सपा सदस्य सदन को हाईजैक करने का प्रयास करती हैं।

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खाद की किल्लत के मुद्दे पर सपा का बहिर्गमन

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सदन में सपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

 विधानसभा में बृहस्पतिवार को सपा सदस्यों ने प्रदेश में खाद की किल्लत को लेकर कृषि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया। इससे पहले मंत्री और सपा सदस्यों के बीच नोकझोंक भी हुई। हालांकि करीब 10 मिनट के बाद सपा सदस्य वापस सदन में आ गए।

सपा सदस्य राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने किसानों को उचित मात्रा में उर्वरकों की आपूर्ति नहीं होने से संबंधित सवाल किया। कृषि मंत्री ने कहा कि सपा सदस्य पहले तय कर लें कि क्या वह प्रदेश की जनता को बीमार करना चाहते हैं। इस पर सपा सदस्य हंगामा करने लगे। मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चिंता जता चुके हैं कि धरती माता बीमार हो रही हैं। हम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके बावजूद हम खाद की कमी नहीं होने देंगे। प्रदेश के 2.80 करोड़ किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया करा रहे हैं। हालांकि मंत्री के जवाब से सपा सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और सदन का बहिर्गमन कर दिया।

इस्तीफा देने की जरूरत नहीं, जनता फिर सबक सिखाएगी
इससे पहले सपा सदस्य समरपाल सिंह और पंकज मलिक ने फसलों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों से गंभीर बीमारियां होने को लेकर प्रश्न किया। समरपाल ने कहा कि पश्चिमी यूपी पंजाब बनता जा रहा है। खुलेआम दवाएं बिक रही हैं, जो कैंसर की वजह बन रही हैं। यदि मेरी बात झूठी निकली तो इस्तीफा दे दूंगा। इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। चुनाव आने वाला है और जनता सबक सिखाने के लिए तैयार बैठी है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की समिति समय-समय पर कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाती है। हाल ही में 5 कीटनाशकों को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन उनके उत्पादन और निर्यात पर रोक नहीं लगाई गई है। प्रदेश में भी बासमती चावल के निर्यात में कोई अड़चन नहीं आने की वजह से 11 रसायनों पर रोक लगाई गई है। उन्होंने सदन को कार्रवाई का ब्योरा भी दिया।

किसानों के मुद्दों पर हंगामा

 समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद में किसानों को उपज का उचित मूल्य न मिलने, बढ़ती लागत, उत्पादन में कमी, प्राकृतिक आपदा, अन्ना पशुओं और सरकारी योजनाओं की जमीनी विफलताओं का मुद्दा उठाया। इन मुद्दों पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के जवाब से असंतुष्ट होकर सपा ने सदन का बहिर्गमन कर दिया।

बृहस्पतिवार को नियम 105 के अंतर्गत सपा के बलराम यादव, राजेन्द्र चौधरी, लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा, डॉ. मान सिंह यादव, मोहम्मद जासमीर अंसारी, शाहनवाज खान, मुकुल यादव और शाह आलम ने किसानों की समस्याएं उठाते हुए कहा कि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, बिजली और सिंचाई के संसाधनों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जबकि लागत के अनुरूप आमदनी नहीं बढ़ी है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य तो घोषित किया जाता है लेकिन वह लागत से काफी कम होता है। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के संचालन, क्रियान्वन और सहायता के लिए कृषि विभाग ने कृषि विस्तार अधिकारी तैनात किए हैं जिनके कुल 303 पदों में से 273 पद खाली हैं। 50 जिलों में तो एक भी अधिकारी नहीं है। 

मिट्टी की उर्वरता की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि यूपी के 65 फीसदी से ज्यादा जिलों की खेती की मिट्टी में जिंक की कमी है। बरेली में 21000 से ज्यादा मिट्टी के नमूनों में 20932 में नाइट्रोजन की कमी पाई गई। पीलीभीत में 9793 सैम्पल में 9788 में नाइट्रोजन कम पाई गई। उन्होंने कहा कि हरी खाद और कम्पोस्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए।

चर्चा के दौरान किरणपाल कश्यप ने कहा कि जब दुकानदार अपनी दुकान में रखे उत्पादों का मूल्य तय कर सकता है तो किसान अपनी फसल का मूल्य क्यों नहीं तय कर सकता। उन्होंने कहा कि गोरखपुर, महाराजगंज आदि जिलों के कोल्ड स्टोरेज किसानों के आलू का बीमा नहीं कराते। अन्ना पशुओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के किसान डंडा लेकर खेत का चौकीदार बनने को मजूबर हैं।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकार किसानों के हित में है। यही वजह है कि यूपी में प्रति व्यक्ति आय 2017 से पहले 54000 रुपये सालाना थी जो वित्त वर्ष 26-27 में बढ़कर 1.20 लाख रुपये अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य से ज्यादा धान क्रय किया गया। 16 लाख से ज्यादा किसानों का 3600 करोड़ से ज्यादा बिजली बिल माफ किया गया। नौ साल में 3 लाख करोड़ से ज्यादा का गन्ना खरीद भुगतान किया गया। कृषि मंत्री ने तंज कसा कि वर्ष 2012 में मिल मालिकों के साथ सांठगांठ सभी को पता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में बुंदेलखंड के सात खंडों में प्राकृतिक खेती की योजना लाई जा चुकी है जो पांच वर्ष के लिए है। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि मंत्री के जवाब पर तीखी बहस के बाद सपा सदस्यों ने विधान परिषद से बहिगर्मन कर दिया।


 

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